‘बिहार में बहार है, बस नीतीशे कुमार है…’ विधानसभा चुनाव के नतीजों की तस्वीर साफ होने बाद ये बात सबकी जुबां पर है. राज्य की 243 सीटों में से NDA डबल सेंचुरी मार दी है. ये अभी 209 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. महागठबंधन का बुरा हाल हो रखा है. शुरुआत में वह 76 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी, लेकिन दोपहर तक बस 27 सीटों पर सिमट गई है.प्रशांत किशोर (PK) की जनसुराज तो ऐसी लुढ़की कि अब तक उठ ही नहीं पाई है. इस बार बिहार में BJP बड़ा भाई बन गई है. पार्टी ने अकेले 94 सीटों पर बढ़त बना रखी है. नीतीश कुमार की JDU 75 सीटों पर आगे चल रही है. लालू के दोनों लाल भी पीछे चल रहे हैं. राघोपुर से चुनाव लड़ रहे छोटे बेटे तेजस्वी यादव करीब 10 हजार वोटों से पीछे चल रहे हैं. बड़े बेटे तेज प्रताप यादव के लिए तो अपनी जमानत बचाना भी मुश्किल लग रहा है. कांग्रेस के हाथ खाली हैं.
महागठबंधन की अगुवाई कर रहे तेजस्वी यादव ने इलेक्शन कैंपेन के दौरान पूरे कॉन्फिडेंस के साथ सरकार बनाने के दावे किए थे. राहुल गांधी और तेजस्वी यादव की केमिस्टी लोगों को अच्छी भी लग रही थी. फिर ऐसा क्या हुआ, जो महागठबंधन की ऐसी दुर्गति हो गई? ऐसे 5 कारण हैं, जिनकी बदौलत महागठबंधन को करारी हार मिलती दिख रही है:-
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