भोपाल- मध्य प्रदेश में बजट 2026-27 को लेकर सियासत गरमा गई है। किसान नेता एवं पूर्व सदस्य कृषि सलाहकार परिषद केदार सिरोही ने इसे किसानों के साथ विश्वासघात का बजट करार दिया है। सिरोही का आरोप है कि जिस साल को सरकार ने “कृषि वर्ष” घोषित किया, उसी साल पेश बजट में किसानों को छुट्टी पर भेज दिया गया। प्रदेश के वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा पेश बजट पर सवाल उठाते हुए सिरोही ने कहा कि नवंबर 2023 के विधानसभा चुनाव में किसानों, गरीबों, महिलाओं और युवाओं से किए गए वादे दस्तावेजों में कहीं नजर नहीं आते।
किसान नेता एवं कृषि अर्थशास्त्री सिरोही ने कहा कि पिछले तीन वर्षों के सरकारी आंकड़े बताते हैं कि किसानों की मेहनत से उत्पादन बढ़ा, लेकिन कृषि संकट और विकराल हुआ है। बढ़ती लागत, अमानक इनपुट, कर्ज का दबाव, फसल बीमा व मुआवजा में गड़बड़ी, बाजार व्यवस्था की विफलता और कृषि शिक्षा, अनुसंधान में नवाचार की कमी जैसे मुद्दों पर बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं दिखता।
उन्होंने कहा कि खराब सरकारी शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के कारण किसान परिवार अपनी आय का 40-50 फीसदी बुनियादी सुविधाओं पर खर्च करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि आज खेती घाटे में है, युवाओं के लिए नौकरी भी नहीं है, नतीजतन किसान पुत्रों के विवाह तक नहीं हो पा रहे। उन्होंने इसे सामाजिक संकट बताते हुए कहा कि इसे बजट में पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
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