चेन्नई, 25 फरवरी (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमेटोग्राफर (छायाकार) व फिल्म निर्देशक एलॉयसियस विंसेंट का यहां बुधवार को एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 86 साल के थे।
विंसेंट के परिवार से जुड़े एक सूत्र ने आईएएनएस को बताया, “वह लंबी बीमारी के बाद चल बसे।”
विंसेंट ने तेलुगू फिल्म ‘चांदनी रानी’ (1953) से बतौर अतिथि सिनेमेटोग्राफर अपने करियर की शुरुआत की।
उसी साल दिग्गज तेलुगू अभिनेत्री भानुमति ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। उस समय वह जेमिनी स्टूडियो के साथ काम कर रहे थे। भानुमति ने वेंसेंट की मुलाकात अपने फिल्मकार पति पी. रामाकृष्णन से करवाई, जिन्होंने अपनी तेलुगू फिल्म ‘बरतुकु तेरुवु’ से विंसेंट को बतौर सिनेमेटोग्राफर लांच किया।
विंसेंट ने तमिल, तेलुगू और कन्नड़ फिल्मोद्योग के साथ ही कुछ हिंदी फिल्मों पर भी काम किया।
छायाकार के रूप में उन्हें ‘नदी’, ‘भक्त प्रह्वलाद’, ‘एंगा वीटू पिल्लै’, ‘अदावी रामुदु’, ‘आदिमाईपेन्न’, ‘वसंत मालिगै’ और ‘प्रेम नगर’ जैसी फिल्मों के लिए याद किया जाता है।
हिंदी में उन्होंने ‘मेहरबां’, ‘माधवी’, ‘बंदिश’, ‘दिल एक मंदिर’ और ‘महान’ जैसी फिल्मों पर काम किया।
विंसेंट को तमिल फिल्म ‘उत्तम पुथीरन’ (1958) के जरिए भारतीय सिनेमा को जूम शॉट से परिचित कराने का श्रेय जाता है।
वर्ष 2003 में इंडियन सोसायटी ऑफ सिनेमेटोग्राफर्स (आईएससी) ने उन्हें मानद सदस्यता से नवाजा।
विंसेंट के परिवार में दो बेटे जयनन विंसेंट और अजयन विंसेंट हैं। दोनों ही लोकप्रिय सिनेमेटोग्राफर हैं।
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