भोपाल, 9 जनवरी (आईएएनएस)। मध्य प्रदेश का बुंदेलखंड सूखा की समस्या से जूझ रहा है, रोजगार का अभाव है, जॉब कार्ड खाली पड़े हैं, पानी के लिए कई किलोमीटर का रास्ता तय करना पड़ रहा है। मगर इस बीच एक अच्छी खबर यह है कि किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा मिल रहा है। यह खुलासा किया है स्वराज अभियान के राष्ट्रीय संयोजक योगेंद्र यादव ने।
यादव इन दिनों मध्य प्रदेश के सूखा ग्रस्त इलाकों का भ्रमण कर रहे हैं। साथ ही अपने दलों को गांव गांव में भेजकर सर्वेक्षण भी करा रहे हैं।
यादव ने शनिवार को आईएएनएस से कहा कि सूखाग्रस्त मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड में निराशा के माहौल बीच यह बात सुखद लग रही है कि किसानों को फसल के नुकसान का मुआवजा मिल रहा है। किसानों ने यह बात उन्हें और उनके दल के लोगों को बताई है।
यादव ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड के कई गांव का भ्रमण कर उन्होंने तथा उनके दलों ने पाया है कि किसानों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। मनरेगा का काम नहीं मिल रहा है, खाने का संकट है, पानी कई कई किलोमीटर दूर से लाना होता है, मगर राज्य सरकार द्वारा किसानों को फसल नुकसान का मुआवजा दिया जा रहा है। किसान इस बात को बेहिचक स्वीकार कर रहे हैं।
यादव ने कहा कि खेत खाली पड़े हैं, तालाब सूख रहे हैं और कुओं में काफी गहराई पर पानी है। स्थिति विकट है और सरकार को इससे निपटने के लिए तुरंत आपातकालीन कदम उठाना चाहिए।
यह बताना लाजिमी है कि राज्य सरकार ने किसानों के बीच लगभग चार हजार करोड़ रुपये का मुआवजा बांटा है। इस मद में उसे केंद्र सरकार से सिर्फ दो हजार करोड़ रुपये की ही मदद मिली है। यह बात अलग है कि कई स्थानों से बहुत कम मुआवजा मिलने की शिकायतें भी आ रही हैं। कई किसानों को तो सौ रुपये से भी कम मुआवजा मिला है।
बुंदेलखंड मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के 13 जिलों को मिलाकर बनता है, मगर हालात एक समान है। एक तरफ वर्षा कम हुई है और दूसरी ओर पैदावार भी काफी कम हुई है। बुंदेलखंड में मध्य प्रदेश के छह जिले- सागर, दमोह, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और दतिया आते हैं तो उत्तर प्रदेश के सात जिले झांसी, जालौन, ललितपुर, हमीरपुर, बांदा, महोबा और चित्रकूट शामिल हैं।
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