रायपुर, 25 जनवरी (आईएएनएस)। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) देशभर में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में कार्यरत संस्कृत के प्राध्यापकों का ब्योरा मांगा है। इससे तैयार डाटा बैंक का इस्तेमाल योजना बनाने के लिए किया जाएगा। इस संबंध में यूजीसी ने देशभर के विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को पत्र लिखा है।
गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि संस्कृत विषय के शिक्षकों का डाटा बैंक तैयार करने के लिए यूजीसी ने पत्र लिखकर जानकारी मांगी है।
उन्होंने कहा, “हमारे यहां विभाग खोलने की प्रक्रिया भी चल रही है। इससे आने वाले समय में छात्रों को काफी लाभ मिलेगा।”
प्रो.श्रीवास्तव ने बताया कि यूजीसी के अध्यक्ष वेद प्रकाश ने इस संबंध में देश के 126 विश्वविद्यालयों को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि संस्कृत की पढ़ाई और विस्तार के लिए खास योजना तैयार की जाएगी। शिक्षकों का डाटा बैंक तैयार करने के लिए विश्वविद्यालयों के साथ समन्वय बनाया जा रहा है। इसके पहले यूजीसी ने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए विभाग खोलने पर जोर दिया था।
बिलासपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अरुण सिंह के मुताबिक, संस्कृत प्राध्यापकों के सबंध में मांगी गई जानकारी यूजीसी को जल्द ही उपलब्ध कराई जाएगी। अकादमिक विभाग संस्कृत प्राध्यापकों से भी संपर्क कर रहा है।
यूजीसी ने संस्कृत की पढ़ाई कराने वाले विश्वविद्यालयों को पाठ्य सामग्री, साहित्य व शोध सामग्री भारतवाणी पर अपलोड करने के लिए भी कहा है।
इसके साथ ही मैसूर स्थित सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडियन लैंग्वेज (सीआईआईएल) से संस्कृत से जुड़ी सभी जानकारी साझा करने के निर्देश दिए हैं। यह लिखित, चित्र, ऑडियो या वीडियो के रूप में हो सकती है। इसे वेब पोर्टल भारतवाणी पर भी अपलोड किया जा सकता है। इस पोर्टल का मकसद विलुप्त हो रही भाषाओं को संरक्षित करना है।
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