लखनऊ , 8 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्र सरकार के बाद अब गंगा को साफ करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने पहल की है। कानपुर के चमड़ा उद्योग के साथ पहली बार तकनीकी लैब और योजना का खाका बनाया है, जिसकी शुरुआत सोमवार को हुई। संयुक्त राष्ट्र के औद्योगिक विकास संगठन (यूनिडो) ने प्रदूषण घटाने के लिए चार तकनीकों पर काम शुरू किया है।
बंथर स्थित कानपुर लेदर क्लस्टर में गंगा सफाई के लिए ठोस काम की नींव सोमवार से पड़ेगी। वियना स्थित यूनिडो के प्रोजेक्ट मैनेजर इवान क्राल खुद इस प्रोजेक्ट को लांच करेंगे।
पूरी योजना का मुख्य फोकस टेनरियों से निकलने वाले उत्प्रवाह में घातक रयासनों को खत्म करना है।
संयुक्त राष्ट्र के प्रोजेक्ट कोआर्डिनेटर एम़ विश्वानथन के मुताबिक, टेनरियों से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने कदम बढ़ाए हैं। इसके तहत चार तकनीकों पर काम हो रहा है।
विश्वनाथन ने बताया कि ‘डिसाल्टिंग’ प्रोसेसिंग से नमक की मात्रा को कम किया जा रहा है। नमक को पानी से अलग कर उसे रीसाइकिल किया जा रहा है। इसी तरह ‘हेयर सेव अनहेयरिंग’ तकनीक के जरिए टेनरियों से निकलने वाले ठोस कचरे में से बालों को अलग किया जाता है।
फिनिशिंग के दौरान खालों से निकले बाल केमिकल से भी खत्म नहीं होते। इनकी वजह से प्लांट चोक हो जाते हैं और जमीन प्रदूषित। इस तकनीक से न सिर्फ बालों को अलग कर दिया जाता है, बल्कि अलग न हो सकने वाले बारीक बाल खास केमिकल के जरिए नष्ट किए जाते हैं।
तीसरी तकनीक है वाटर मिजरमेंट एंड मिक्सिंग, जिसमें पानी के अत्यधिक इस्तेमाल को कम किया जाता है। पानी के अनुपात को फिक्स किया जाता है।
चौथी तकनीक सोलर असिस्टेड हट वाटर है। इसमें सूर्य की रोशनी से पानी गर्म होता है, जिसे टेनिंग और अन्य काम में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसमें उद्यमियों को प्रदूषण को खुद ही चेक करना सिखाया जा रहा है।
विदेशों में स्थित टेनरियों के तकनीकी पेशेवरों से टिप्स, ऑनलाइन ट्रेनिंग और मॉनीटरिंग सिस्टम भी इसमें शामिल है।
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