न्यायमूर्ति पंकज मित्तल ने यह आदेश अधिवक्ता निमाई दास के माध्यम से दाखिल दीपक मित्रा की अर्जी पर दिया है। बीमार होने के कारण हाईकोर्ट ने कंपनी को बंद करने का निर्देश दिया था। अर्जी में मांग की गई है कि कंपनी उन्हें दे दी जाए, वह मित्रा प्रकाशन को फिर से चालू करना चाहते हैं।
गौरतलब है कि मित्रा प्रकाशन से ‘माया’, ‘मनोहर कहानियां’, ‘सत्यकथा’, ‘मनोरमा’ व ‘प्रो-इंडिया’ नामक पत्रिकाएं प्रकाशित की जाती थीं। दीपक मित्रा का कहना है कि वह कंपनी को नए सिरे से चलाना चाहते हैं।
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