नई दिल्ली, 14 फरवरी (आईएएनएस)। ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को गंभीरता से लेने वाले शीर्ष 75 शहरों को मान्यता देने की तैयारी कर ली गई है। इस सूची में आने वाले शहरों को दो करोड़ लोगों से मिली प्रतिक्रिया और कई अन्य मानकों के आधार पर चुना गया है।
‘भारतीय गुणवत्ता परिषद’ द्वारा कराए गए एक ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ को केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू सोमवार को जारी करेंगे। यह सर्वेक्षण इन सवालों का जवाब देगा कि कौन-सा भारतीय शहर सबसे साफ है? कौन-से शहर इस मामले में अग्रणी हैं? कौन-से शहर पीछे चल रहे हैं?
परिषद के अध्यक्ष आदिल जैनुलभाई ने आईएएनएस को बताया, ” ‘स्वच्छ भारत अभियान’ को शुरू हुए 16 महीने हो चुके हैं। अब इसका प्रभाव जानने का समय है। ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ हमें 75 शहरों में सफाई और जागरूकता के स्तर का आकलन करने में मदद करेगा।”
यह पूछे जाने पर कि भारत में साफ-सफाई की स्थिति को देखते हुए क्या इस प्रकार के अभियान का आकलन जल्दी नहीं किया जा रहा? जैनुलभाई ने कहा, “इसके विपरीत हम अभियान को अधिक सफल बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हम शहरों के बीच स्वस्थ प्रतियोगिता की भावना विकसित करना चाहते हैं।”
उन्होंने कहा, “हमने इस ओर कदम आगे बढ़ाते हुए स्वच्छ सर्वेक्षण को त्रैमासिक करने का फैसला किया है और देश में 4,000 शहरों को इसके दायरे में लिया जाएगा।”
परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि स्वच्छ सर्वेक्षण में जनता की प्रतिक्रिया, नगर निगमों द्वारा स्वमूल्यांकन और विशेषज्ञों द्वारा व्यक्तिगत मूल्यांकन को शामिल किया गया है।
जैनुलभाई ने बताया कि 110 आकलनकर्ताओं ने (जिनमें से अधिकांश इंजीनियर थे) कई मानकों के तहत मूल्यांकन करने के लिए हर शहर का दौरा किया। सर्वेक्षण के लिए बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों, नियोजित और अनियोजित मुहल्लों, सामुदायिक शौचायलों, धार्मिक स्थलों और बाजारों में यह मूल्यांकन किया गया।
इस प्रयोग से पूर्व आधार वर्ष में 476 शहरों में पूर्व सर्वेक्षण भी किया गया था। उसके बाद परिणामों का 75 शहरों में से प्रत्येक के नवीनतम निष्कर्षो से मिलान किया गया।
जैनुलभाई ने बताया कि परिणामों को वेबसाइट ‘माय गवर्नमेंट’ पर भी साझा किया जाएगा।
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