भाजपा सांसद सत्यपाल ने निर्वाचन आयोग से सरकारी बकाया छुपाया

मुंबई, 19 मार्च (आईएएनएस)। बागपत से भाजपा सांसद सत्यपाल सिंह ने लोकसभा चुनाव के दौरान शहर के समाहर्ता को दिए शपथ-पत्र में अपने ऊपर सरकारी बकाया की जानकारी छुपाई थी। एक सूचना अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता ने यहां शनिवार को यह जानकारी दी।

सूचना अधिकार कार्यकर्ता अनिल गलगली को आरटीआई के तहत मिले जवाब के अनुसार, सिंह ने कथित रूप से जनवरी 2013 में मुंबई उपनगरीय जिला समाहरणालय द्वारा लगाए गए 48 हजार 420 रुपये के जुर्माने का भुगतान नहीं करने की बात छुपा ली थी। सिंह मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त और भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रहे हैं।

यह जुर्माना इस वजह से लगाया गया था कि सत्यपाल सिंह ने अंधेरी स्थित पाटलीपुत्र सोसाइटी के अपने फ्लैट को समाहर्ता से सही ढंग से अनुमति लिए बगैर किराये पर लगा दिया था। कानून के मुताबिक अनुमति लेना अनिवार्य था।

ऐसा इस वजह से कि उस सोसाइटी की इमारत सरकारी अनुदान प्राप्त जमीन पर विशेष रूप से शीर्ष अधिकारियों के रहने के लिए बनाई गई है। इसे किराए पर देने से पहले तय फीस चुकाकर समाहर्ता से अनुमति लेना अनिवार्य है।

समाहर्ता ने वर्ष 2013 में 28 जनवरी को सिंह को नोटिस दिया था। तब वह मुंबई के पुलिस आयुक्त थे। कई स्मार-पत्र देने के बावजूद उन्होंने उस नोटिस की अवहेलना की थी।

बाद में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए सिंह ने पुलिस आयुक्त का पद छोड़ दिया था और उत्तर प्रदेश के बागपत सीट से विजयी रहे थे।

राष्ट्रीय लोकदल के अजीत सिंह को हराने वाले सत्यपाल सिंह ने इस सरकारी बकाए का उल्लेख अपने शपथ-पत्र में नहीं किया, जबकि निर्वाचन आयोग के नियमानुसार यह जरूरी था।

सिंह को वर्ष 2014 के जून में तब बहुत शर्मिदा होना पड़ा था, जब एक निजी कंपनी को किराए पर दिए उसने फ्लैट में पुलिस ने छापामारी कर वेश्यावृत्ति कराने वाले गिरोह को पकड़ा था।

गलगली ने अब निर्वाचन चुनाव आयोग, लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर मांग की है कि निर्वाचन आयोग के नियमों का उल्लंघन करने को लेकर सिंह की लोकसभा की सदस्यता खत्म की जाए।

सांसद सिंह से इस मुद्दे पर तत्काल संपर्क नहीं किया जा सका।

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