नई दिल्ली, 19 मार्च (आईएएनएस)। एक स्थानीय अदालत ने दिल्ली विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर एस.ए.आर. गिलानी को शनिवार को जमानत दे दी।
गिलानी को फरवरी में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश दीपक गर्ग ने गिलानी को जमानत दी और उन्हें 50,000 का निजी बॉन्ड और इतनी ही जमानत राशि देने का आदेश दिया।
अदालत ने कहा कि गिलानी 16 फरवरी से पुलिस की हिरासत में हैं और आगे की जांच के लिए उनकी जरूरत नहीं है और जांच पूरी होने में समय लगेगा।
अदालत ने कहा, “इस मामले की बाकी की जांच के लिए उन्हें हिरासत में रखने का कोई लाभ नहीं होगा।”
इससे पहले दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को अदालत से कहा था कि गिलानी के खिलाफ गंभीर आरोप हैं। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि वह बिना आज्ञा के दिल्ली से बाहर नहीं जाएंगे।
अदालत ने कहा है कि गिलानी को आदेशानुसार निजी बॉन्ड और जमानत राशि देने के दौरान निचली अदालत में अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा।
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को कहा था कि गिलानी के खिलाफ लगे सबी आरोप गंभीर है।
कश्मीर से ताल्लुक रखने वाले गिलानी ने नौ फरवरी को संसद हमले के दोषी अजफल गुरु को फांसी दिए जाने की बरसी पर दिल्ली के प्रेस क्लब में एक कार्यक्रम का आयोजन किया था। उन पर इस दौरान देश के खिलाफ नारेबाजी करने का आरोप है।
गिलानी ने बुधवार को अदालत में नए सिरे से जमानत याचिका दायर की थी।
अपनी याचिका में गिलानी ने कहा है कि वह 16 फरवरी के बाद से ही न्यायिक हिरासत में हैं और आगे भी उन्हें जेल में रखने से कोई सार्थक उद्देश्य पूरा नहीं होगा।
गिलानी ने यह भी कहा कि उन्होंने जांच में सहयोग किया है और उनके खिलाफ कोई सबूत नहीं है।
इससे पहले एक मजिस्ट्रेट ने 19 फरवरी को गिलानी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। पुलिस का आरोप है कि कार्यक्रम में कश्मीरी छात्रों के एक गुट ने भारत विरोधी नारे लगाए।
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