दिनभर चले प्रदर्शन के दौरान नौ सूचना आयुक्तों के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी की गई। इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने राज्यपाल व मुख्यमंत्री के नाम जिला प्रशासन के आधिकारी को ज्ञापन देकर प्रदर्शन खत्म किया। साथ ही अगले 45 दिनों में मांगें पूरी न पर चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी दी।
आरटीआई कार्यकर्त्ी उर्वशी शर्मा ने राज्य सूचना आयोग में महिला यौन-उत्पीड़न मामलों की जांच के लिए विशाखा समिति बनाने और आयोग की सभी कार्यवाहियों की शत-प्रतिशत वीडियो रिकॉर्डिग कराने की बात कही।
उन्होंने इन रिकॉर्डिग को आईटी एक्ट में प्राविधानित समय तक संरक्षित रखकर किसी भी पक्षकार द्वारा मांगे जाने पर उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई।
उर्वशी के मुताबिक, 45 दिन में मांगों पर कार्यवाही नहीं होने पर क्रमश: 27 मई से आरटीआई भवन में कार्य बहिष्कार, 1 जुलाई से कार्य रोको और 15 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव कर ‘जेल भरो’ आंदोलन चलाया जाएगा।
तनवीर अहमद सिद्दीकी ने कहा कि सूचना आयुक्तों द्वारा आरटीआई आवेदकों का उत्पीड़न किया जा रहा है। आरटीआई एक्ट में सूचना आयुक्तों के लिए पारदर्शिता के संरक्षक की भूमिका निर्धारित है। पर यूपी के वर्तमान सूचना आयुक्त इससे उलट नितांत अपारदर्शी और निरंकुश रीति से कार्य कर पारदर्शिता के विनाशक बनते जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सूचना आयुक्त भ्रष्टाचार में लिप्त होकर न केवल दोषी जनसूचना अधिकारियों को संरक्षण देकर भ्रष्टाचार को पोषित कर रहे हैं, बल्कि आरटीआई आवेदकों द्वारा भ्रष्टाचार से संबंधित संवेदनशील प्रकरणों की सूचना मांगने पर आयुक्त उन पर उन पर झूठे आरोप लगाकर उनको सुनवाइयों में आने से रोकने का षड्यंत्र करने से भी नहीं चूक रहे हैं।
प्रदर्शन में रशीद अली आजाद, हयात कादरी, संजय आजाद, हरपाल सिंह भी शामिल रहे।
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