नई दिल्ली, 9 मई (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीए और एमए के अंकपत्रों में नाम अलग-अलग तरीके से लिखा है। यह कोई नहीं जानता कि ऐसा क्यों है।
दिल्ली विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ कॉरस्पांडेंस कोर्सेज’ से 17 जुलाई 1975 को बीए (पास) खंड 1 का जो अंकपत्र जारी किया गया है, उसमें उनका नाम ‘नरेंद्र कुमार दामोदरदास मोदी’ है।
इस परक्षा में मोदी को कुल 400 अंकों में से 165 अंक मिले हैं और वह उत्तीर्ण हैं।
दूसरे साल का अंकपत्र 20 जुलाई, 1976 को जारी किया गया है। इसमें उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ है। उन्हें 400 में 121 अंक मिले और फेल घोषित किए गए हैं।
वर्ष 1977 में 26 जुलाई को जो अंक पत्र जारी हुआ, उसमें ‘नरेंद्र कुमार दामोदरदास मोदी’ नाम लिखा हुआ है। दूसरे और तीसरे वर्ष दोनों में यही नाम है। दूसरे वर्ष तीन पत्रों में अनुपस्थित लिखा हुआ है और 1200 अंकों में कुल मिलाकर 367 पाए हैं और अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित हैं।
उसी साल की पूरक परीक्षा में उनका नाम ‘नरेंद्र कुमार दामोदरदास मोदी’ है। वह अंकपत्र 12 जनवरी, 1978 को जारी हुआ है। उसमें 1200 अंकों में मोदी को 473 अंक मिले और फिर अनुत्तीर्ण (फेल) घोषित हैं।
17 फरवरी, 1979 को जारी अंकपत्र में उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ है और 1200 अंक में 489 मिले हैं और थर्ड डिवीजन से उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं।
इसी तरह गुजरात विश्वविद्यालय की एमए प्रथम वर्ष के अंकपत्र में उनका नाम ‘नरेंद्रकुमार दामोदरदास’ है जबकि द्वितीय वर्ष के अंकपत्र में नाम ‘मोदी नरेंद्र दामोदरदास’ है।
हालांकि दिल्ली विश्वविद्यालय (1979) और गुजरात विश्वविद्यालय (1983) दोनों डिग्री में उनका नाम ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ है।
dharmpath.com dharmpath