मुंबई, 23 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने यहां कहा कि भारत चहुंमुखी विकास को सुनिश्चित करते हुए अपनी समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के प्रति आश्वस्त है।
यहां अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस पर एक कार्यक्रम में जावड़ेकर ने रविवार रात कहा कि यह एक भ्रम है कि पारिस्थितिकी संरक्षण और विकास एक साथ नहीं हो सकता।
जावड़ेकर ने कहा, “पर्यावरण व विकास को एक दूसरे के विरोधी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। ऐसा नहीं है कि एक को बढ़ावा देने से दूसरे के साथ समझौता करना पड़ेगा। पर्यावरण संरक्षण की नीतियों के निर्माण के दौरान ही जीविकोपार्जन की चिंता का समाधान किया जाना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि पांच करोड़ लोगों की आजीविका सुनिश्चित करते हुए केंद्र सरकार गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल व तमिलनाडु तक फैले पश्चिमी घाट की समृद्ध जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक नीति बनाएगी।
जावड़ेकर ने पर्यावरण व जैव विविधता के लिए सफल अन्य आंदोलनों की तरह एक ‘जन आंदोलन’ का आह्वान किया।
महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.वी.राव ने जैविक संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करते हुए खाद्य सुरक्षा की चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार, व्यापार, कृषि शोध संस्थानों, किसानों व गैर सरकारी संस्थानों (एनजीओ) के बीच साझेदारी का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि नवोन्मेषी विचारों व तकनीकों से जंगल से इकट्ठा किए गए चावल की एक प्रजाति से 50 हजार किस्में पैदा की गईं, जबकि आम की एक प्रजाति से एक हजार किस्में पैदा की गई हैं।
राज्यपाल ने कहा कि जैव विविधता लोगों से सीधे तौर पर जुड़ी है और इसका संरक्षण कृषि, वन्य, मत्स्य पालन तथा पर्यटन में सतत विकास की उपलब्धि के लिए एक पूर्व शर्त है।
राव ने कहा कि बढ़ती आबादी, तेजी से औद्योगीकरण व शहरीकरण तथा जलवायु परिवर्तन ने हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाला है और देश को इन चुनौतियों से निपटने के लिए एक व्यापक नीति की जरूरत है।
इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) के भारतीय प्रवक्ता यूरी अफनासीव ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
राव व जावड़ेकर ने असम की पूर्णिमा देवी बर्मन और हरगिला आर्मी, नेशनल कंजर्वेशन फाउंडेशन ऑफ मैसूर, अरुणाचल प्रदेश के घोरा-अभे सोसायटी, मेघालय के मावकिरनोत स्वयं-सहायता समूह तथा अन्य लोगों व संगठनों को ‘भारतीय जैव विविधता पुरस्कार, 2016’ प्रदान किया।
संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को लेकर प्रत्येक वर्ष 22 मई को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता दिवस मनाया जाता है।
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