कोलकाता, 2 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के पूर्व मंत्री मदन मित्रा ने गुरुवार को कहा कि वह मतदान के दौरान पुलिस के एक वर्ग की ‘अति सक्रियता’ की वजह से चुनाव हार गए।
मीडियाकर्मियों से यहां बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, “मैंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक रिपोर्ट दी है कि पुलिस उपायुक्त, बैरकपुर पुलिस कमीश्नरी के सहायक पुलिस आयुक्त और बेलघाड़िया पुलिस थाना निरीक्षक सहित पुलिस का एक वर्ग अति सक्रिय था।”
उन्होंने कहा, “इन पुलिसकर्मियों ने महिलाओं सहित सही मतदाताओं को प्रताड़ित किया और मतदान करने नहीं दिया। मतदान के पांच-सात दिन पहले निर्दोष लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।”
उन्होंने कहा, “मतदाताओं को भयभीत करके मतदान के प्रतिशत को कम किया गया।”
मदन मित्रा एक मात्र पूर्व मंत्री हैं जिन्होंने जेल से चुनाव लड़ा था और 24 परगना जिले के कामाराहाटी विधानसभा सीट को बरकरार रखने में नाकाम रहे। वह मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के मानस मुखर्जी से चार हजार मतों से पराजित हो गए थे।
अरबों रुपये के शारदा घोटाले में जेल में बंद पूर्व परिवहन एवं खेल राज्यमंत्री तृणमूल के उन दर्जनभर से अधिक नेताओं में भी थे जो एक स्टिंग में कथित रूप से एक फर्जी कंपनी का पक्ष लेने के लिए रिश्वत के रूप में नोटों का बंडल स्वीकार करते नजर आए थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मित्रा को वर्ष 2014 के दिसंबर में गिरफ्तार किया था। मित्रा तृणमूल के उन कुछ बड़े नेताओं में शामिल हैं जो राज्य में पार्टी की प्रचंड जीत के बावजूद चुनाव हार गए।
dharmpath.com dharmpath