श्रीनगर, 9 जुलाई (आईएएनएस)। जम्मू एवं कश्मीर में सुरक्षा बलों की गोली से हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद यहां जारी विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षबलों की झड़प में आठ लोगों की मौत हो गई, जबकि सुरक्षाकर्मियों सहित 100 से अधिक लोग घायल हुए हैं।
पूरे पुलवामा जिले में कर्फ्यू लगाने के बावजूद वानी के जनाजे में शामिल होने के लिए दक्षिणी कश्मीर के त्राल कस्बे में 20,000 से अधिक लोग उमड़ पड़े।
वानी के जनाजे में शामिल युवाओं ने भावावेश में इस्लाम और आजादी के समर्थन में नारेबाजी की।
21 वर्षीय वानी चरमपंथ समर्थकों का चहेता था और सोशल मीडिया पर उसके हजारों की संख्या में अनुयायी थे।
वानी को उसके दो सहयोगियों के साथ शुक्रवार को अनंतनाग जिले के बामडोरा (कोकरनाग) गांव में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में मार गिराया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि कश्मीर में वानी की मौत के मद्देनजर किसी भी तरह की अफवाह की आशंका को देखते हुए पूरी घाटी में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं। राज्य में अस्थिरता के माहौल को देखते हुए शनिवार को अमरनाथ यात्रा भी स्थगित कर दी गई।
प्रशासन ने किसी भी तरह का संघर्ष टालने के लिए अंतिम संस्कार स्थल के चारों ओर तैनात सभी सुरक्षाबलों को हटाकर अंतिम संस्कार की इजाजत दे दी थी, हालांकि शुक्रवार को शवों को दफनाने की प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी थी।
प्रदर्शन के दौरान जिन लोगों की मौत हुई है, उनकी पहचान अनंतनाग के सिलीगाम के एजाज अहमद ठोकरू, अनंतनाग के यावर मंजूर कोंडरू, कुलगाम के खुर्शीद अहमद और कुलगाम के जुबैर अहमद, अनंतनाग के दुरू के आदिल बशीर, अनंतनाग के अरवामी गांव निवासी अब्दुल हामिद मोची, बिजबेहरा के शौकत अहमद और कोकरनाग के मोहम्मद आसिफ के रूप में की गई है।
जुबैर अहमद शुक्रवार को ही जख्मी हो गया था और शनिवार को उसकी मौत हुई। सुरक्षा बलों ने पुलिस थानों, चल सुरक्षा चौकियों, सुरक्षा पिकेट, गश्ती पुलिस दल और सुरक्षा बलों के वाहनों पर हमला करने वाली हिंसक हो गई भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोलियां चलाईं जिसमें सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, जबकि कोंडरू की मौत झेलम नदी में गिरकर डूबने से हुई।
अपराध जांच विभाग (सीआईडी) के अतिरिक्त महानिदेशक एस. एम. सहाय और कश्मीर के पुलिस महानिरीक्षक एस. जी. एम. गिलानी ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में बताया कि सुरक्षाकर्मियों सहित करीब 95 लोग घायल हुए हैं।
अधिकारियों के अनुसार हिंसक भीड़ ने दक्षिणी कश्मीर में एक पुलिस थाना भी फूंक दिया और राजमार्ग पर निजी और सरकारी वाहनों में भी तोड़-फोड़ की।
प्रशासन ने स्कूल से विश्वविद्यालय स्तर की सभी परीक्षाएं स्थगित कर दीं, जिसमें राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (नेट) और राज्य सेवा आयोग का साक्षात्कार भी शामिल है।
कश्मीर के बारामूला से जम्मू के बनिहाल के बीच रेल सेवा भी रोक दी गई है।
अलगाववादी नेता सैयद अली शाह गिलानी, मध्यमार्गी मीरवाइज उमर फारूक और यासीन मलिक ने इससे पहले वानी की मौत के विरोध में एक दिन के बंद का आह्वान किया था। हालांकि शनिवार को घोषणा की कि बंद रविवार और सोमवार को भी जारी रहेगा।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस बीच शनिवार को घाटी में आतंकवाद के बढ़ने की चिंता जाहिर की है।
नेशनल कांफ्रेंस के नेता ने कई सारे ट्वीट किए, जिनमें उन्होंने कहा, “मेरी बात याद रखना – कब्र से आतंकवादियों की भर्ती करने की बुरहान की क्षमता, सोशल मीडिया के जरिए उसके द्वारा की जा सकने वाली भर्ती को पछाड़ देगी।”
उन्होंने यह भी कहा कि वानी घाटी में असंतुष्ट समुदाय के लिए नया ‘आइकन’ बन गए हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री उमर ने अपने ट्वीट में कहा, “मेरे ऊपरी श्रीनगर मुहल्ले की मस्जिद से मैंने कई सालों बाद यह नारा सुना कि मुझे आजादी चाहिए। कश्मीर को कल नया असंतुष्ट आइकन मिल गया।”
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