धर्म-अध्यात्म

ढोचका मे पहली बार लगा भगोरीया मेला –सजघज कर आए यूवक यूवतियो व बच्चो ने भगोरीया का लूत्फ उठाया

अनिल श्रीवास्तव-पारा–– आदिवासी लोक संस्कृति का उत्सव ’’भगोरीया’’ के आगाज के साथ ही पहली बार लगने वाले ग्राम पंचायत ढोचका मेें भगोरीया मेला का शूभारंभ विधायक निर्मला भूरीया, सरपंच खेलसिह वसूनिया व धर्मगूरू खूमसिह महाराज ने पूजन कर किय। भगोरीया उत्सव का रंग दोपहर बाद परवान चढा रंगारंग वस्त्रों मे आयी मद मस्त युवक युवतियों की टोलियों ने मेंला स्तर …

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समाज के प्रणेता अग्र शिरोमणि महाराजा अग्रसेन

 महाराजा अग्रसेन अग्रवाल जाति के  पितामह थे। वे युग पुरुष, रामराज्य के समर्थक एवं महादानी थे। उनमें अलौकिक साहस,  अविचल दृढ़ता गम्भीरता, अद्भुत सहनशिलता दूरदर्शिता, विस्तृत दृष्टिकोण गुण विद्यमान  थे। इनका जन्म मर्यादा पुरुषोतम भगवान श्रीराम की चौंतीसवी पीढ़ी में सूर्यवशीं  क्षत्रिय कुल के महाराजा बल्लभसेन के घर में द्वापर के अन्तिमकाल और कलियुग के  प्रारम्भ में आज से लगभग …

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पहले इंजीनियर , वास्तुविद ,मिस्त्री .कारीगर – भगवान् विश्वकर्मा

प्राचीन ग्रंथो उपनिषद एवं पुराण आदि का अवलोकन करें तो पायेगें कि आदि काल से ही विश्वकर्मा शिल्पी अपने विशिष्ट ज्ञान एवं विज्ञान के कारण ही न मात्र मानवों अपितु देवगणों द्वारा भी पूजित और वंदित है । भगवान विश्वकर्मा के आविष्कार एवं निर्माण कोर्यों के सन्दर्भ में इन्द्रपुरी, यमपुरी, वरुणपुरी, कुबेरपुरी, पाण्डवपुरी, सुदामापुरी, शिवमण्डलपुरी आदि का निर्माण इनके द्वारा …

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जिंद पीर झूलेलाल-महान अवतारी पुरुष और सिंधियों के ईष्ट देव

भारतीय धर्मग्रंथों में कहा गया है कि जब-जब अत्याचार बढ़े हैं, नैतिक मूल्यों का क्षरण हुआ है तथा आसुरी प्रवृत्तियाँ हावी हुई हैं, तब-तब किसी न किसी रूप में ईश्वर ने अवतार लेकर धर्मपरायण प्रजा की रक्षा की।कहा जाता है कि सिंध प्रांत की हिंदू जनता मुस्लिम शासक मिरख शाह के अत्याचारों से त्रस्त हो चुकी थी। जनता ने इस …

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सवा लाख से एक लड़ाऊँ चिड़ियों सों मैं बाज तड़ऊँ तबे गोबिंदसिंह नाम कहाऊँ – गुरु गोविंद सिंह

गुरु गोविंद सिंह (जन्म- 22 दिसंबर सन 1666 ई. पटना, बिहार, मृत्यु- 7 अक्तूबर सन 1708 ई. नांदेड़, महाराष्ट्र) सिक्खों के दसवें व अंतिम गुरु माने जाते थे, और सिक्खों के सैनिक संगति, ख़ालसा के सृजन के लिए प्रसिद्ध थे। वह बहुभाषाविद थे, जिन्हें फ़ारसी अरबी, संस्कृत और अपनी मातृभाषा पंजाबी का ज्ञान था। उन्होंने सिक्ख क़ानून को सूत्रबद्ध किया, …

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गुरूदेव रविन्द्रनाथ टैगोर

रविन्द्र नाथ टैगोर (रवीन्द्रनाथ ठाकुर, रोबिन्द्रोनाथ ठाकुर) (7 मई, 1861-7  अगस्त,1941) को गुरुदेव के नाम से भी जाना जाता है। वे विश्वविख्यात कवि,  साहित्यकार, दार्शनिक और भारतीय साहित्य के एकमात्र नोबल पुरस्कार (1913) विजेता  हैं। बांग्ला साहित्य के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक चेतना में नयी जान फूँकने  वाले युगदृष्टा थे। वे एशिया के प्रथम नोबेल पुरस्कार सम्मानित व्यक्ति है। वे  …

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-स्वामी दयानंद सरस्वती

आर्य समाज के संस्थापक तथा समाज-सुधारक  स्वामी दयानंद सरस्वती का जन्म सन्‌ 1824 में एक ब्राह्मण परिवार में मुंबई में हुआ। उनका बचपन का नाम मूलशंकर था। धर्म सुधार हेतु अग्रणी रहे दयानंद सरस्वती ने 1875 में मुंबई में आर्य समाज की स्थापना की थी और पाखण्ड खण्डिनी पताका फहराकर कई उल्लेखनीय कार्य किए। वेदों का प्रचार करने के लिए …

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भगारिया पर्व की दी बधाईयां – गैर मे शामील होने का किया आव्हान

(अनिल श्रीवास्तव)झाबुआ—भारतीय जनता पार्टी ने जिले की लोकपर्व एवं सांस्कृतिक धरोहर भगोरियापर्व के आगमन पर समस्त जिलेवासियों को बधाईया दी है । जिला भाजपा अध्यक्ष शैलेष दुबे, प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष दिलीपसिंह भूरिया, जिले के विधायकगण सर्वश्री शांतिलाल बिलवाल, निर्मला भूरिया, कलसिंह भाबर, संगठनमंत्री मोहनगिरी, जिलाउपाध्यक्ष मनोहर सेठिया, पुरूषोत्तम प्रजापति, जिला महामंत्री प्रवीण सुराणा, राजू डामोर, जिला मीडिया प्रभारी राजेन्द्रकुमार सोनी, …

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संत तुकाराम

गली -गली में, घर-घर तक विट्ठल नाम की गूंज पहुंचाते लोकगायक का नाम आते ही आंखों  के सामने मराठी भाषा के सर्वश्रेष्ठ संतकवि तुकाराम का चित्र उभरता है। उनके अभंग  जन-जन के कंठ में बसे हैं और यह संदेश भी कि प्रभु को अपने जीवन का केंद्र बनाओ।  प्यार की राह पर चलो। दीनों की सेवा करो और देखोगे कि …

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महावीर

भगवान महावीर के बचपन का नाम वर्धमान था। उनका जन्म राज परिवार में हुआ था। राज  परिवार में चैत्र द्रुक्ल पक्ष के तेरस ( १२ अप्रैल ५९९ बी.सी.) को हुआ था। उनके  पिता का नाम राजा सिद्धार्थ और माता का नाम रानी त्रिच्चाला था। कहते हैं कि उनके  पैदा होने के पहले रानी त्रिशाला ने १४ पवित्र सपने देखें जो …

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