खुसुर फुसुर

भोपाल में पूर्व विधायक अपने ही दल के नेता के निशाने पर

(खुसुर-फुसुर)– भोपाल में भाजपा के पूर्व विधायक की जमीन का मामला और उस पर भोपाल नगर-निगम का हमला क्या हुआ राजनीती में भूचाल आ गया.पूर्व विधायक जो अभी हाशिये पर हैं और उमा भारती समर्थक माने जाते हैं ने तेवर बदलते हुए धरना दे दिया.जैसे ही यह खबर फैली भाजपा में स्थानीय भूचाल आ गया ,तुरत-फुरत महापौर ने धरना स्थल …

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लोकतंत्र की उडेंगी धज्जियाँ-मप्र भाजपा संगठन चुनाव

भोपाल– मप्र भाजपा संगठन चुनाव नजदीक है लेकिन इन चुनावों में लोकतंत्र की धज्जियाँ उडेंगी यह अभी से स्पष्ट दिख रहा है.कई छुटभैये नेता जो अपने आकाओं के आश्वासन को पेट में नहीं पचा पाए वे पोल खोल रहे हैं.असली मेहनत की जा रही है वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष को पुनः गद्दी पर बैठाने की तैयारी को लेकर. सूत्रों ने बताया …

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विश्व हिंदी सम्मेलन का पास जुगाड़ो अभियान

(खुसुर-फुसुर)– भोपाल में चल रहे विश्व हिंदी सम्मेलन में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बार-कोड वाले प्रवेश-पत्र बनवाये गए लेकिन गले में प्रवेश-पत्र लटकाए फोटो खिंचवाते कई ऐसे चेहरे नजर आयेंगे जिनके नाम प्रवेश-पत्र जारी ही नहीं हुआ था.फिर वे गले में रंगीन पट्टिका डाले आयोजन में कैसे प्रवेश पा गए यह सुरक्षा में बड़ी चूक है. भोपाल में जुगाडूलाल रात …

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भाजपा के सह-कार्यालय मंत्री राजेन्द्र सिंह निकले हिंदी ज्ञान के छुपे-रुस्तम

(खुसुर-फुसुर)धर्मेन्द्र पैगवार-विश्व हिंदी सम्मेलन नहीं हुआ बहती गंगा हो गई। राजधानी में विदेश मंत्रालय द्वारा 10 सितंबर को आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के निमंत्रण मप्र के कई बड़े साहित्यकारों और हिंदी का मान बढ़ाने वालों के पास नहीं पहुंचे हैं। हालांकि इस सरकारी कार्यक्रम में पूरी भाजपा सेट हो गई है। कार्यक्रम के लिए जो सरकारी प्रतिनिधि मंडल की …

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विश्व हिंदी सम्मेलन की खींचतान

(खुसुर-फुसुर)– एक तो विश्व हिंदी सम्मलेन को हिंदी के प्रचार-प्रसार की जगह राजनैतिक लाभ लेने का अखाड़ा बना दिया गया है.अहिन्दी भाषी राज्य में विश्वहिंदी सम्मेलन आयोजित करने की बजाय हिंदी भाषी राज्य में किया जा रहा  है .इससे ही हिंदी के प्रति आयोजकों का लगाव परिलक्षित होता है. बात करें यहाँ चल रहे युद्ध की.आयोजकों में एक मुख्य सूत्रधार …

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मप्र में कांग्रेस का भाव अभी भी है भारी

(खुसुर-फुसुर)– जो नेता जिस परंपरा या परिवारवाद में आगे बढ़ता है गुण उसके ही सीखता है.मप्र काग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव की अति प्रतीक्षारत सूची जब सामने आई तो असंतोष के स्वर सामने आये.इस सूची की नियुक्तिओं में पैसों के लेन-देन की चर्चा भी खूब चली.खैर इस सब से किसी को आश्चर्य नहीं हुआ,यदि हुआ तो यह की भाजपा का दावा …

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लाल-बत्ती की दौड़ में बने गुलदस्ता झपटमार

(खुसुर-फुसुर)– लाल बत्ती की दौड़ में शोर्ट-कट से दौड़ लगा रहे एक मप्र भाजपा के नेताजी अपने आका जिन्होंने उनके लिए अपना वीटो चलाया है को लेने उड़न-खटोला स्थल पर पहुंचे.हड़बड़ी या दिवास्वप्न में महोदय यह भूल गए की गुलदस्ता भी ले जाया जाय.जब वे उड़न-खटोला स्थल पर पहुंचे तो अवाक रह गए क्योंकि वहां आये सभी आगंतुक गुलदस्ता ले …

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जब कांग्रेसी क्षत्रप के हुए अरमान ठन्डे

(खुसुर-फुसुर)– मप्र कांग्रेस कमेटी के दफ्तर में चेंबर में बैठने वाले एक कद्दावर पदाधिकारी के पास एक बैंक अधिकारी आई.चूंकि महाशय एक संस्था के प्रमुख भी हैं अतः उस महिला का मकसद अपने बैंक के लिए संस्था के खाते खुलवाना था. कहते हैं आदतें बदलती नहीं हैं,महाशय ने अति प्रसन्नता से सम्पूर्ण मप्र में खाते खुलवाने का भरोसा दे दिया …

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मप्र भाजपा महिला मोर्चा -बिहार चुनाव से दूर रहेगी

(खुसुर-फुसुर)– मप्र भाजपा से महिला मोर्चा की सदस्यों को बिहार चुनाव में परचम फहराने से रोक दिया गया है.उत्तरप्रदेश ,महाराष्ट्र एवं अन्य चुनावों में सक्रीय भूमिका निभाने वाली महिलाओं को संगठन ने बिहार जाने से मना कर दिया है. बताया जाता है की कुछ महिला कार्यकर्ता बिहार जाने के लिए अपनी इच्छा जता चुकी थीं,लेकिन उन्हें स्पष्ट रूप से कह …

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आरामगाह में बैठ कर कर डाला जर्जर सड़कों का निरिक्षण

(खुसुर-फुसुर)– मप्र शासन के एक निर्माण विभाग के मुखिया भोपाल से बाहर दौरे पर गए.ये महाशय सड़कों के निरिक्षण के लिए ट्रेन से दौरे पर गए आखिर आराम का जो मामला था क्योंकि इन्हें पता था की सड़कें खराब हैं.खैर महोदय जिनके साथ गए उन्हें अपना नहीं बताते हैं फिर क्यों गए इसके उत्तर में वे चुप रह जाते हैं. …

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