एफबीआई ने मोस्ट वांटेड सूची से हटाया भाजपा नेता शिवराज सिंह डाबी का नाम-डाबी दोष-मुक्त

shivraj dabiअनिल सिंह(भोपाल)- मार्च 2015 में एक खबर पूरे विश्व की सनसनी बन गयी थी जिसमें भोपाल से मप्र भाजपा आईटीसेल में कार्यरत शिवराज सिंह डाबी को अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने भगोड़ा घोषित कर अपनी वांछित अपराधियों की सूची में शामिल कर दिया था.

यह थी खबर

वाशिंगटन. अमेरिका के फेडरल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टीगेशन (एफबीआई) ने फरार साइबर अपराधी भारतीय नागरिक शिवराज सिंह डाबी को अपनी अवांछित सूची में रखा है. एफबीआई ने डाबी की तलाश के लिए अंग्रेजी, पंजाबी और हिंदी भाषा में पोस्टर भी जारी किए हैं, जिसमें उसके बारे में जानकारी मांगी गई है. एफबीआई ने नोटिस में 42 वर्षीय डाबी को कंप्यूटर संबंधी अपराधों के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिए गैरकानूनी उड़ान भरने का आरोपी बताया है और आशंका जाहिर की है कि वह भागकर भारत जा पहुंचा है. नोटिस में कहा गया है कि डाबी कई सारे छद्म नामों का उपयोग करता है, जो शिवरा डाबी, शिवरहा डाबी, शिवरहा एस. डाबी, शवरहा सिंह डाबी हो सकते हैं. एफबीआई ने नोटिस में यह भी जानकारी दी है कि डाबी का कद पांच फीट छह इंच है और वजन 140 से 160 पौंड के बीच है. उसके बाल काले हैं और आंखों का रंग भूरा है. एफबीआई के मुताबिक, डाबी को 2007 में कैलिफोर्निया के सैक्रामेंटो काउंटी में कंपनी के मालिक के कंप्यूटर से जानबूझ कर छेड़छाड़, उसमें से कुछ चीजें हटाने और उसे क्षति पहुंचाने का दोषी पाया गया था. 2008 में अमेरिकी जिला अदालत ने डाबी को गिरफ्तारी बचने के लिए गैरकानूनी उड़ान भरने का दोषी पाकर गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था.

अमरीकी कंपनी की साजिश का शिकार हुए डाबी 

अमरीका में सोफ्टवेयर इंजीनियर का कार्य करने वाले डाबी एक कंपनी से कार्य को छोड़कर दूसरी कंपनी में अच्छे पद और वेतन पर नियुक्त हो गए बस यहीं से पहली कंपनी ने साजिश रचते हुए डाबी पर अनर्गल आरोप लगाते हुए उन्हें अमरीका में कार्य ना करने की साजिश रची और एक झूठे साइबर अपराध केस में फंसाना चाहा.शिवराज अपनी पत्नी और बच्चों को भारत छोड़ने आये उसी समय कंपनी के अधिकारीयों ने अमेरिका के कानून का गलत फायदा उठाते हुए शिवराज सिंह डाबी को भगोड़ा घोषित करवा एफबीआई की वांछित सूची में नाम दर्ज करवा दिया.

शिवराज सिंह डाबी ने लड़ी लम्बी लड़ाई 

इस बात की खबर डाबी को नहीं हुई और ना ही एफबीआई ने कोई नोटिस डाबी को दिया और ना ही संपर्क किया जबकि डाबी का पासपोर्ट,फेसबुक अकाउंट,मेल एकाउंट,फोन नंबर सब चालू थे.अखबारों में खबर छपने के बाद डाबी ने दूतावास से संपर्क कर मदद मांगी.वहां से उन्होंने एफबीआई के अधिकारीयों से संपर्क कर उनके क़ानूनी प्रक्रिया में सभी सहयोग की बात कही.डाबी के इस कदम से अधिकारीयों ने सहयोग करते हुए जांच की और डाबी को निर्दोष पाया एवं डाबी का नाम सूची से हटा दिया.

शिवराज सिंह डाबी के पत्रचार, और उनकी बेगुनाही के सभी सबूत हमारे पास प्राप्त हुए और एक निर्दोष को हुई पीड़ा और उसकी बेगुनाही हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं.

 

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