अनिल सिंह(भोपाल)- मार्च 2015 में एक खबर पूरे विश्व की सनसनी बन गयी थी जिसमें भोपाल से मप्र भाजपा आईटीसेल में कार्यरत शिवराज सिंह डाबी को अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने भगोड़ा घोषित कर अपनी वांछित अपराधियों की सूची में शामिल कर दिया था.
यह थी खबर
अमरीकी कंपनी की साजिश का शिकार हुए डाबी
अमरीका में सोफ्टवेयर इंजीनियर का कार्य करने वाले डाबी एक कंपनी से कार्य को छोड़कर दूसरी कंपनी में अच्छे पद और वेतन पर नियुक्त हो गए बस यहीं से पहली कंपनी ने साजिश रचते हुए डाबी पर अनर्गल आरोप लगाते हुए उन्हें अमरीका में कार्य ना करने की साजिश रची और एक झूठे साइबर अपराध केस में फंसाना चाहा.शिवराज अपनी पत्नी और बच्चों को भारत छोड़ने आये उसी समय कंपनी के अधिकारीयों ने अमेरिका के कानून का गलत फायदा उठाते हुए शिवराज सिंह डाबी को भगोड़ा घोषित करवा एफबीआई की वांछित सूची में नाम दर्ज करवा दिया.
शिवराज सिंह डाबी ने लड़ी लम्बी लड़ाई
इस बात की खबर डाबी को नहीं हुई और ना ही एफबीआई ने कोई नोटिस डाबी को दिया और ना ही संपर्क किया जबकि डाबी का पासपोर्ट,फेसबुक अकाउंट,मेल एकाउंट,फोन नंबर सब चालू थे.अखबारों में खबर छपने के बाद डाबी ने दूतावास से संपर्क कर मदद मांगी.वहां से उन्होंने एफबीआई के अधिकारीयों से संपर्क कर उनके क़ानूनी प्रक्रिया में सभी सहयोग की बात कही.डाबी के इस कदम से अधिकारीयों ने सहयोग करते हुए जांच की और डाबी को निर्दोष पाया एवं डाबी का नाम सूची से हटा दिया.
शिवराज सिंह डाबी के पत्रचार, और उनकी बेगुनाही के सभी सबूत हमारे पास प्राप्त हुए और एक निर्दोष को हुई पीड़ा और उसकी बेगुनाही हम आपके सामने प्रस्तुत कर रहे हैं.
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