भुवनेश्वर, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। ओडिशा सरकार की एक अंतर्विभागीय समिति ने शनिवार को 26 कोयला खदानों के पट्टे की अवधि बढ़ाने की सिफारिश की है।
खदानों की पट्टा अवधि बढ़ाने की यह सिफारिश नए कोयला एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम 2015 के तहत की गई।
विकास आयुक्त यू.एन बेहरा की अध्यक्षता वाली समिति ने 18 नॉन कैप्टिव खदानों सहित 26 खदानों की पट्टा अवधि बढ़ाने की सिफारिश की है। सर्वोच्च न्यायालय ने मई 2014 में इन कोयला खदानों को बंद करने का निर्देश दिया था।
हालांकि राज्य सरकार को इन खदानों की पट्टा अवधि बढ़ाने पर अंतिम फैसला करना है।
अंतर्विभागीय समिति ने राज्य में 26 कोयला खदानों की पट्टा अवधि बढ़ाने की सिफारिश की है। इन सभी खदानों को वन एवं पर्यावरण मंजूरियों सहित सभी वैधानिक मंजूरियां मिल गई हैं।
खदानों के निदेशक दीपक मोहंती ने कहा, “बंद पड़ी कोयला खदानों को दोबारा खोलने का फैसला नए एमएमडीआर अधिनियम 2015 के प्रावधानों के अनुसार किया गया।”
उन्होंने कहा कि समिति ने एमएमडीआर अधिनियम के प्रावधानों के तहत कैप्टिव खदानों (ऐसी खदानों से उत्पादित कोयले का इस्तेमाल स्वामित्व रखने वाली कंपनियां खुद करती हैं) की पट्टा अवधि को 2030 तक और नॉन कैप्टिव खदानों की पट्टा अवधि को 2020 तक बढ़ाने की सिफारिश की है।
जिन 26 कोयला खदानों को दोबारा चालू करने की सिफारिश की गई है। उनमें 22 कोयला खदानें ऐसी हैं, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद बंद कर दी गई थीं।
पिछले साल मई में सर्वोच्च न्यायालय ने 26 कोयला खदानों को बंद कर दिया था। सरकार ने राज्य में आठ खदानों को संचालित करने के निर्देश जारी किए थे।
भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) की तीन कोयला खदानों और ओएमसी की एक कोयला खदान की पट्टा अवधि भी बढ़ाई जाएगी।
मोहंती ने कहा कि समिति ने टाटा स्टील की बाकी चार खदानों की भी पट्टा अवधि बढ़ाने की सिफारिश की है।
लेकिन सरकार द्वारा खदानों में संचालन दोबारा शुरू करने जैसे समान निर्देश जारी करने तक 18 कोयला खदानों में संचालन बंद रहेगा।
राज्य सरकार ने नॉन कैप्टिव खदानों पर विचार करने के लिए इस साल फरवरी में सर्वोच्च न्यायालय से दो महीने का अतिरिक्त समय मांगा था।
सरकार ने अनुरोध किया था कि एमएमडीआर संशोधन अधिनियम 2015 में नए संशोधनों को पेश करने के परिणामस्वरूप इन मामलों की जांच के लिए अधिक समय की जरूरत है।
dharmpath.com dharmpath