कादर खान 79 की उम्र में रंगमंच पर सक्रिय (जन्मदिन पर विशेष)

imagesनई दिल्ली, 22 अक्टूबर – अपनी आवाज और संवाद अदायगी के खास अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले अभिनेता कादर खान बुधवार को 79 साल के हो गए। खान ऐसे बहुमुखी कलाकार हैं, जिन्होंने 300 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में सहनायक, खलनायक, हास्य अभिनेता, चरित्र अभिनेता और संवाद लेखक के रूप में अपनी छाप छोड़ी है। कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर, 1935 को बलूचिस्तान (पाकिस्तान) में हुआ था। हालांकि भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद उनका परिवार भारत में बस गया और उन्होंने अपनी स्नातकोत्तर की पढ़ाई यहां उस्मानिया विश्वविद्यालय (हैदराबाद) से पूरी की।

कादर खान के बारे में कम ही लोगों को यह पता होगा कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक शिक्षक के रूप में की थी। कॉलेज के वार्षिकोत्सव में एक बार उन्हें अभिनय करने का मौका मिला, जहां मशहूर अभिनेता दिलीप कुमार भी मौजूद थे। दिलीप उनके अभिनय से इतने ज्यादा प्रभावित हुए कि उनके सामने फिल्म ‘सगीना’ में काम करने का प्रस्ताव रख दिया। यहीं से कादर खान के अभिनय करियर का अध्याय शुरू हुआ।

शिक्षण से करियर की शुरुआत के बाद सिनेमा में कदम रखने का ही नतीजा है कि कादर के अंदर एक शिक्षक, एक संवाद लेखक और एक अभिनेता तीनों के गुण मौजूद हैं और उन्हें बहुमुखी प्रतिभा का धनी कहा जाता है।

कादर खान भाग्यवश हिंदी सिनेमा जगत में आ तो गए, लेकिन यहां उन्हें अपने कदम जमाने के लिए कम संघर्ष नहीं करने पड़े।

कादर की पहली फिल्म ‘सगीना’ के बाद उनकी कई फिल्में नहीं चलीं। 1977 में ‘खून पसीना’ और ‘परवरिश’ की सफलता के बाद आखिरकार उन्हें तेजी से कई फिल्मों के प्रस्ताव मिलने लगे और उन्हें ‘मुकद्दर का सिकंदर’, ‘मिस्टर नटवरलाल’, ‘सुहाग’, ‘अब्दुल्ला’, ‘दो और दो पांच’, ‘लूटमार’, ‘कुर्बानी’, ‘याराना’, ‘बुलंदी’ और ‘नसीब’ जैसी बड़े बजट की फिल्मों में काम करने का मौका मिला।

इन फिल्मों में कादर खान ने खलनायक से लेकर हास्य अभिनेता तक के किरदार में सफलता की नई बुलंदियों को छुआ और बतौर अभिनेता फिल्म जगत में स्थापित हो गए।

वर्ष 1983 में प्रदर्शित फिल्म ‘कुली’ कादर खान के करियर की सुपरहिट फिल्मों में शुमार की जाती है, जिसमें अभिनेता अमिताभ बच्चन ने मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म तो टिकट खिड़की पर सुपरहिट साबित हुई ही, कादर फिल्म जगत के नामचीन खलनायकों में शामिल हो गए।

वर्ष 1990 में आई फिल्म ‘बाप नंबरी बेटा दस नंबरी’ में दमदार हास्य अभिनय के लिए कादर खान फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किए गए।

कादर खान अब तक 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं, लेकिन उनकी प्रतिभा यहीं नहीं थमती। वह 80 से अधिक लोकप्रिय फिल्मों के लिए संवाद भी लिखा है, लेकिन कुछ सालों से उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली है।

फिलहाल वह अपने बेटों सरफराज खान एवं शाहनवाज खान के रंगमंच समूह और उनके नाटकों में व्यस्त हैं, जो उनके लिखे दो नाटकों ‘मेहरबां कैसे-कैसे’ और ‘लोकल ट्रेन’ का मंचन कर रहे हैं।

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