जम्मू में खुला सिविल सचिवालय का कार्यालय

जम्मू, 9 नवंबर (आईएएनएस)। जम्मू और कश्मीर में परंपरा अनुसार सोमवार को राज्य की शीतकालीन राजधानी जम्मू में अगले छह महीने के लिए सिविल सचिवालय का काम शुरू हो गया।

मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद सुबह कार्यालय पहुंचे और उन्हें औपचारिक तौर पर सम्मान स्वरूप ‘गॉर्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया।

सईद ने सिविल सचिवालय के विभिन्न प्रशासनिक कार्यालयों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री के साथ उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों और वरिष्ठ नौकरशाहों सहित राज्य के कई वरिष्ठ अधिकारी भी कार्यालय पहुंचे।

राज्य के डोगरा महाराजाओं द्वारा स्थापित की गई 170 साल पुरानी परंपरा का निर्वाह करते हुए सिविल सचिवालय कार्यालय छह-छह माह के लिए राज्य की शातकालीन और ग्रीष्मकालीन राजधानियों में चलाया जाता है।

इस परंपरा की शुरुआत 1846 में की गई थी, जब ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने एक संधि (अमृतसर संधि) पर हस्ताक्षर किए थे। इस संधि के तहज सिंधु नदी के पूर्वी पहाड़ी क्षेत्रों और रावी नदी का पश्चिम क्षेत्र का नियंत्रण डोगरा महाराज गुलाब सिंह को सौंपा गया था।

सिविल सचिवालय राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में 30 अक्टूबर को बंद कर दिया गया।

सईद ने हालांकि अन्य मुख्यमंत्रियों की तरह पारंपरिक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन नहीं किया। इस अवसर पर राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख्तर ने संवाददाताओं से बात की।

अख्तर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित किए गए 80,000 करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज को राज्य के लोगों के विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि जम्मू और कश्मीर के लिए मोदी के पैकेज में कोई राजनीतिक संदेश नहीं था।

उमर के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अख्तर ने कहा, “जब वह सत्ता में थे, तो भारत से पाकिस्तान पर हमला करवाना चाहते थे और अब जब वह हार गए हैं, तो अलग ही भाषा बोल रहे हैं।”

अख्तर ने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन की प्राथमिकता राज्य में पिछली सरकार द्वारा की गई गंदगी को साफ करना है।

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