नेपाल में मंगलवार के भूकंप से जीवन बेपटरी

काठमांडू, 13 मई (आईएएनएस)। नेपाल 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप से अभी उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार को एक बार फिर 7.3 तीव्रता के जोरदार भूकंप से पूरा देश कांप उठा। इसके बाद बुधवार सुबह तक 11 झटके महसूस किए गए।

काठमांडू, 13 मई (आईएएनएस)। नेपाल 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप से अभी उबर भी नहीं पाया था कि मंगलवार को एक बार फिर 7.3 तीव्रता के जोरदार भूकंप से पूरा देश कांप उठा। इसके बाद बुधवार सुबह तक 11 झटके महसूस किए गए।

तीन सप्ताह के भीतर एक बार फिर भूकंप के जोरदार झटकों ने दहशत को फिर से ताजा कर दिया। लोगों को अब अपने घर ही असुरक्षित लगने लगे हैं और वे खुले आकाश के नीचे और तंबुओं में रहने को मजबूर हैं।

जिन लाखों लोगों ने 25 अप्रैल को आए विनाशकारी भूकंप के मद्देनजर काठमांडू छोड़ दिया था, वे अब वापस अपने घर लौटने लगे थे, लेकिन मंगलवार के जोरदार झटके से एक बार फिर उनके बीच दहशत पैदा हो गई है।

काठमांडू महानगर शहर कार्यालय (केएमसीओ) के मुताबिक, 100 से अधिक इमारतों में दरारें आ गई हैं और वे क्षतिग्रस्त हो गई हैं। यहां तक कि 25 अप्रैल के बाद जिन इमारतों को सुरक्षित बताया गया था, उन्हें भी भारी क्षति पहुंची है।

केएमसीओ के प्रवक्ता शांताराम पोखरेल ने कहा कि काठमांडू स्थित लगभग सभी पुरानी इमारतें (100 साल से ज्यादा पुरानी 70 हजार इमारतें) या तो धराशायी हो गई हैं या उन्हें भारी क्षति पहुंची है।

मंगलवार को आए भूकंप के बाद कई नई इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिसके कारण लोग खुले में रहने को मजबूर हैं।

स्कूलों को 15 मई को खुलना था, लेकिन उन्हें मई के अंत तक बंद रखने का आदेश जारी किया गया है। सैकड़ों स्कूलों ने अस्थायी शिविरों का रूप ले लिया है।

भूकंप के तत्काल बाद नेपाल के प्रधानमंत्री सुशील कोईराला ने आम जनों से संयम व शांति बनाए रखने की अपील की है।

काठमांडू में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने कहा कि ताजा भूकंप व बाद के झटकों से अतिरिक्त क्षति हुई है। उन इलाकों में भी क्षति हुई है, जो 25 अप्रैल को आए भूकंप से पहले से ही प्रभावित थे।

कार्यालय के मुताबिक, कई लोग घायल हुए हैं और आवासों तथा बुनियादी ढांचों को अतिरिक्त क्षति पहुंचने की खबर है।

संयुक्त राष्ट्र कार्यालय ने एक बयान में कहा, “लोगों को एक बार फिर खुले आकाश के नीचे शरण लेनी पड़ी और ऐसे लोगों की संख्या बेहद अधिक होने की आशंका है। प्रारंभिक आकलन का काम जारी है, लेकिन मानवीय सहायता की जरूरत में स्पष्ट तौर पर इजाफा होने की उम्मीद है।”

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