पारंपरिक दवाओं पर वैश्विक सम्मेलन में हिस्सा लेंगे 40 देशों के विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 9 फरवरी- नई दिल्ली में 15 फरवरी से तीन दिवसीय इंटरनेशनल कांग्रेस ऑफ द सोसायटी फॉर एथनोफार्माकॉलाजी का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी ऑस्ट्रेलिया, जापान, चीन समेत करीब 40 देशों के 100 से ज्यादा विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। केंद्रीय आयुष मंत्री श्रीपद नाईक इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। दुनियाभर में परंपरागत रूप से इस्तेमाल किए जाने वाले औषधीय पौधों को लेकर पहली बार देश में एक विश्वस्तरीय सम्मेलन हो रहा है।

जामिया हमदर्द विवि में आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में देश भर से विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान औषधियों पौधों पर चर्चा की जाएगी। साथ ही उन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के उपायों की रुपरेखा तैयार होगी। इस सम्मेलन का उद्देश्य यह है कि किसी एक समूह विशेष में इस्तेमाल हो रही किसी परंपरागत औषधि को मौजूदा मानकों पर परखा जाए और यदि वास्तव में वह प्रभावी है तो उससे दवा विकसित की जाए जिसका फायदा पूरी दुनिया को मिले।

इस सम्मेलन में करीब 40 देशों के 100 से ज्यादा विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं जो अपना व्याख्यान देंगे, जबकि दो हजार से अधिक प्रतिनिधि हिस्सा लेंगे। इसके अलावा 860 लिखित एवं मौखिक प्रजेंटेशन होंगे जो उपरोक्त औषधीय पौधों के परंपरागत इस्तेमाल से जुड़े होंगे।

सम्मेलन के आयोजकों ने कहा कि इस सम्मेलन में जिन परंपरागत औषधों का जिक्र होगा उनका दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा क्योंकि कई समूहों में मौखिक रूप से औषधों का इस्तेमाल होता है और यदि एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी उनका अनुशरण नहीं करती है तो ऐसे परंपरागत औषधीय ज्ञान के लुप्त होने का खतरा रहता है।

इस बात भी चर्चा होगी कि यदि ऐसे परंपरागत औषधों से कोई महत्वपूर्ण दवा भविष्य में बनती है तो उस पर किसका हक होगा या उस समूह विशेष को इसका क्या लाभ होगा।

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