‘बी’ ग्रेड में ही रहेगा नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़

वहीं केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी स्पष्ट कर दिया है कि माओवाद प्रभावित राज्यों में पुलिस आधुनिकीकरण का काम भी राज्यों को अपने संसाधनों के माध्यम से करना होगा।

छत्तीसगढ़िया सांसदों ने बुधवार को राज्यसभा में जमकर बवाल मचाया था। कांग्रेसी सांसदों की मांग की थी कि छत्तीसगढ़ को ‘बी’ श्रेणी से हटाकर ‘ए’ श्रेणी में शामिल किया जाए। मगर केंद्र सरकार ने भाजपा के राज्यसभा सदस्य भूषणलाल जांगड़े के एक सवाल के जवाब में स्पष्ट कर दिया कि छत्तीसगढ़ को किसी भी कीमत पर ‘ए’ श्रेणी में नहीं रखा जा सकता।

केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हरिभाई पार्थी भाई चौधरी ने स्पष्ट किया कि मंत्रालय और सुरक्षा मामलों पर बनाई गई संसदीय समिति के निर्णय से ही श्रेणियों का निर्धारण होता है।

ज्ञात हो कि नक्सल प्रभावित जिन राज्यों को ‘ए’ श्रेणी में रखा जाता है, उन्हें केंद्रीय सहायता 90 फीसदी दी जाती है। वहीं ‘बी’ श्रेणी के राज्यों में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60-40 की होती है। ‘ए’ श्रेणी में जम्मू एवं कश्मीर के अलावा पूर्वोत्तर के 8 राज्य आते हैं।

छत्तीसगढ़ को पिछले दो साल में इन्फ्रास्ट्रक्च र स्कीम के तहत 115 करोड़ और एमआर स्कीम के तहत 381 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इस बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ ने स्पष्ट कर दिया है कि माओवाद प्रभावित राज्यों में पुलिस आधुनिकीकरण का काम भी राज्यों को अपने संसाधनों के माध्यम से करना होगा।

छत्तीसगढ़ सरकार वैसे भी केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती के खर्च से परेशान है। इसे इन बलों की तैनाती के एवज में केंद्र को 1235 करोड़ रुपये देने हैं। संप्रग से लेकर राजग सरकार तक से यह रकम माफ करने का अनुरोध किया जाता रहा है, मगर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भाजपा शासित छत्तीसगढ़ का यह प्रस्ताव ठुकरा दिया है।

मजेदार बात यह है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने हाल ही में जारी आंकड़ों मेंयह माना है कि नक्सलवाद प्रभावित 10 राज्यों के मुकाबले छत्तीसगढ़ में नक्सली हिंसा सबसे ज्यादा हो रही है।

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