मेकेदातु परियोजना पर कर्नाटक से बातचीत नहीं : तमिलनाडु

चेन्नई, 10 दिसम्बर (आईएएनएस)। तमिलनाडु के एक मंत्री सी.वी. षणमुगम ने सोमवार को कर्नाटक सरकार से कहा कि मेकेदातु बांध परियोजना पर निर्णय लेना संभव नहीं है, क्योंकि मामला विचाराधीन है।

कानून, न्यायालय और जेल मंत्री षणमुगम ने कर्नाटक सरकार से एक पत्र के जरिए कहा है कि वह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन कर मेकेदातु के लिए विस्तृत परियोजना रपट(डीपीआर) तैयार न करे।

षणमुगम छह दिसंबर को कर्नाटक के जल संसाधन और चिकित्सा शिक्षा मंत्री शिवकुमार द्वारा भेजे गए पत्र का जवाब दे रहे थे। शिवकुमार ने परियोजना पर चर्चा के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के. पलनीस्वामी से मुलाकात का समय मांगा था।

षणमुगम ने कहा, “कर्नाटक सरकार की ओर से तमिलनाडु से परियोजना पर चर्चा के लिए आग्रह करना तमिलनाडु द्वारा 30 नवंबर को दाखिल याचिका की सुनवाई को बाधित करने का प्रयास है। इसके अलावा यह पांच दिसंबर को सर्वोच्च न्यायालय में आपके(शिवकुमार) और अन्य के विरुद्ध अवमानना की कार्यवाही को बाधित करने का प्रयास है। मामला अब विचाराधीन है।”

मंत्री ने कहा कि कर्नाटक सरकार को तमिलनाडु से बिना अनुमति के कावेरी बेसिन में किसी भी प्रकार की निर्माण गतिविधि नहीं करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “नए जलाशय/परियोजना पर किसी भी तरह का निर्माण या फिर विस्तृत परियोजना रपट की तैयारी भी 16 फरवरी, 2018 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का स्पष्ट उल्लंघन होगा।”

षणमुगम के अनुसार, कर्नाटक सरकार ने 16 फरवरी को सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का उल्लंघन करते हुए केंद्रीय जल आयोग से अनुमति प्राप्त की और तमिलनाडु या फिर किसी भी बेसिन के राज्यों को भरोसे में लिए मेकादातु परियोजना के लिए डीपीआर बनाने काम शुरू कर दिया।

षणमुगम ने कहा कि कर्नाटक सरकार ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण(सीडब्ल्यूएमए) को भी इस बारे में सूचित नहीं किया।

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