पंजाब चुनाव : ‘आप’ में उठापटक व बेदम चौथे मोर्चे ने बढ़ाई अनिश्चितता

चंडीगढ़, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि पहली बार पंजाब की अधिकांश विधानसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के साथ चुनाव दिलचस्प होगा। लेकिन, विगत एक महीने में जिस तरह से हालात बदले हैं, उससे राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।

चंडीगढ़, 27 सितम्बर (आईएएनएस)। ऐसी उम्मीद की जा रही थी कि पहली बार पंजाब की अधिकांश विधानसभा सीटों पर त्रिकोणीय मुकाबले के साथ चुनाव दिलचस्प होगा। लेकिन, विगत एक महीने में जिस तरह से हालात बदले हैं, उससे राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बन रहा है।

पहले आम आदमी पार्टी (आप) के अंदर कलह शुरू हुई और बाद में क्रिकेटर से राजनेता बने नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य लोगों ने तामझाम के साथ चौथे मोर्चे की घोषणा की, लेकिन जो सिरे से परवान नहीं चढ़ सका।

मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही आम आदमी पार्टी पंजाब के चुनावी परिदृश्य में चुनौती पेश करने वाली सबसे नई पार्टी थी। करीब एक साल से जिस तरह आप के राजनीतिक भाग्य आकार ले रहे थे, उसे देख यह अनुमान लगाया जा रहा था कि पार्टी पंजाब की दो बड़ी पारंपरिक पार्टियों सत्ताधारी शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस को चुनौती देने को तैयार है।

लेकिन, विगत एक माह में ‘आप’ में अंदरुनी कलह का जो विस्फोट हुआ, उससे अकाली-भाजपा गठबंधन और कांग्रेस के सितारे फिर चमक गए हैं। इन दलों के नेता अगले साल जनवरी-फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनावों में संभावनाओं को लेकर अचानक उत्साहित हो गए हैं।

आप में पहली अंदरूनी लड़ाई तब हुई जब 117 सदस्यीय विधानसभा के लिए 32 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की गई। धनवानों और बाहरी लोगों के हाथों टिकट बेचने का खुलेआम आरोप लगाया गया।

जब टिकट वितरण को लेकर परेशान पार्टी के नेता और कार्यकर्ताओं ने पार्टी छोड़नी शुरू कर दी, तब आप की पंजाब इकाई को एक और घोटाले से झटका लगा। प्रदेश में पार्टी के संयोजक सुच्चा सिंह छोटेपुर को भ्रष्टाचार के आरोप में पार्टी से तब निकाल दिया गया जब एक वीडियो में कथित रूप से उन्हें पैसे लेते हुए दिखाया गया।

छोटेपुर ने कहा था कि 32 में 25 उम्मीदवारों के चयन गलत हुए हैं।

छोटेपुर प्रकरण के बाद आप की पंजाब इकाई दो खेमों में बंट गई। पार्टी के करीब आधे नेता छोटेपुर के पक्ष में खड़े हो गए। हालांकि पार्टी नेतृत्व ने मामले की जांच की घोषणा की, लेकिन छोटेपुर ने जांच प्रक्रिया में शामिल होने से मना कर दिया और खुलेआम पार्टी नेतृत्व का विरोध किया।

इसके बाद छोटेपुर और उनके समर्थकों ने पार्टी नेतृत्व को बेनकाब करने के लिए आप के खिलाफ राजनीतिक अभियान शुरू कर दिया। छोटेपुर आप नेतृत्व, खास तौर पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और वरिष्ठ नेता दुर्गेश पाठक व संजय सिंह पर पंजाबी नेतृत्व को दरकिनार करने का खुलेआम आरोप लगाते हैं। यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि आप का दिल्ली वाला गैर पंजाबी नेतृत्व पंजाब को नियंत्रण में लेना चाहता है।

छोटेपुर ने यह भी कहा कि केजरीवाल पंजाब का मुख्यमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।

इस साल के शुरू में हुए चुनावी सर्वेक्षण में आप को 75 से अधिक सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया था। पार्टी खुद भी 110 सीटें जीतने की उम्मीद कर रही थी। लेकिन, अब पार्टी के लिए स्थितियां प्रतिकूल हो गई हैं। केजरीवाल पंजाब का दौर कर पार्टी के भाग्य को फिर संवारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन पार्टी के लिए पहले जैसी स्थिति नहीं रही है।

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