कानून का शासन आतंकवाद के खिलाफ प्रभावी हथियार : भारत

संयुक्त राष्ट्र, 7 मार्च (आईएएनएस)। भारत ने कहा है कि कानून का शासन आतंकवाद से लड़ने का सर्वाधिक प्रभावी हथियार है। इसके साथ ही भारत ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी कानूनों को लागू कर राष्ट्रीय कानूनी प्रणालियों को मजबूत किया जाना चाहिए।

संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक कुमार मुखर्जी ने संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद रोधी केंद्र (यूएनसीसीटी) के सलाहकार मंडल की एक बैठक में कहा, “हमारे विचार से आतंकवाद से निपटने में कानून के शासन का उपयोग इस वैश्विक चुनौती से निपटने का सर्वाधिक प्रभावी उपाय है।”

मुखर्जी ने कहा कि इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों की कानूनी क्षमताओं को बढ़ाना होगा।

उन्होंने कहा, “राष्ट्रीय कानून प्रणाली आतंकवादियों के खिलाफ प्रभावी तरीके से मुकदमा चलाने और उन्हें दंडित करने के लिहाज से पर्याप्त रूप में अनुकूल होनी चाहिए, और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र की उचित आतंकवाद रोधी व्यवस्था में उपलब्ध कानूनी नियमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।”

मुखर्जी ने सुझाव दिया है कि यूएनसीसीटी संयुक्त राष्ट्र विधि विभाग के साथ परामर्श करे और संयुक्त राष्ट्र के आतंकवाद रोधी कानूनों की एक सूची तैयार करे जो सभी देशों पर लागू हो।

मुखर्जी ने विदेशी आतंकवादी लड़ाकों द्वारा पेश चुनौती की ओर ध्यान खींचा और सीमा पार आतंकवाद के यूएनसीसीटी के अध्ययन का विस्तार कर उसके दायरे में उन सभी देशों को लाने का सुझाव दिया, जो इस समस्या से ग्रस्त हैं।

मुखर्जी ने कहा कि आतंकवाद अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा है। उन्होंने सुझाव दिया कि महासचिव बान की-मून यूएनसीसीटी को आतंकवाद से मुकाबले में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर अपनी सिफारिशों से अवगत कराएं। इससे यूनसीसीटी को एक बहुवर्षीय कार्यक्रम तैयार करने में मदद मिलेगी, जिसे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र के 70वें वार्षिक शिखर सम्मेलन में पेश किया जा सकता है।

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