स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि 35 वर्षीय मरीज आठ जून को मर्स की चपेट में आया था। उसे घातक लिंफोमा भी था। कैंसर रोधी दवाएं खाने की वजह से उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत क्षीण हो गई थी।
एक नवंबर को उसकी मर्स कोरोना वायरस जांच कराई गई थी, जिसकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी, लेकिन बुधवार को उसकी मौत से 10 दिन पहले उसके मर्स से पीड़ित होने की पुष्टि हुई थी।
उसने 172 दिनों तक मर्स से जिंदगी की लड़ाई लड़ी। दुनिया में वह पहला मरीज है, जो मर्स की चपेट में आने के बाद इतने दिनों तक जीवित रहा।
दक्षिण कोरिया में मर्स का पहला मामला इस साल 20 मई को सामने आया था और तब से 186 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। इनमें से 38 मरीजों की मौत हो चुकी है।
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