पीयूष गोयल ने नई सौर अप्रतिरोधी इमारत का उद्घाटन किया

गुड़गांव, 14 मई (आईएएनएस)। केन्द्रीय विद्युत, कोयला और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पीयूष गोयल ने गुरुवार को हरियाणा के गुड़गांव में स्थित राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान की नई सौर अप्रतिरोधी इमारत का उद्घाटन किया।

राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (एनआईएसई) भारत सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के प्रशासकीय नियंत्रण में सौर ऊर्जा में अनुसंधान और विकास का शीर्ष राष्ट्रीय केन्द्र है। यह जवाहरलाल नेहरू सौर मिशन (जेएनएनएसएम) के तहत देश में होने वाले सौर ऊर्जा से जुड़े अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी संबंधी कार्यो में समन्वय स्थापित करता है।

इस अवसर पर गोयल ने एक जैव ईंधन (बायोमास) ज्ञान पोर्टल भी लांच किया, जिसका उद्देश्य विद्युत उत्पादन के लिए बोयोमास के कारगर इस्तेमाल से संबंधित सूचनाओं का प्रसार करना है।

यह पोर्टल ग्रिड से जुड़ी परियोजनाओं के साथ-साथ ग्रिड से न जुड़ी परियोजनाओं की स्थापना के लिए बायोमास संसाधन की संभावनाओं, नवीनतम प्रौद्योगिकी और तकनीकी जानकारियों से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध कराएगा।

नई इमारत के उद्घाटन के बाद मंत्री ने इस परिसर में स्थित विभिन्न सौर परियोजनाओं का मुआयना किया। राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान का परिसर जल्द ही अपनी विद्युत संबंधी तमाम आवश्यकताओं की पूर्ति सौर ताप एवं सौर फोटोवोल्टिक तकनीकों के साथ परिसर में स्थापित सौर बिजली परियोजनाओं से करने लगेगा। एनआईएसई ने ‘विशुद्ध रूप से शून्य विद्युत केन्द्र’ बनने का लक्ष्य रखा है।

इस संस्थान की स्थापना में एनआईएसई के सभी अधिकारियों एवं विद्यार्थियों की भूमिका व योगदान की सराहना करते हुए गोयल ने कहा, “आने वाले दिनों में एनआईएसई की भूमिका काफी बढ़ जाएगी क्योंकि देश की ऊर्जा सुरक्षा आंतरिक रूप से नवीकरणीय ऊर्जा मिशन की सफलता से जुड़ी हुई है।”

उन्होंने कहा कि 1,75,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के लक्ष्य को वर्ष 2022 के बजाय वर्ष 2019-20 तक ही पाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए।

मंत्री ने ‘अंतर्राष्ट्रीय सौर नीति एवं अनुप्रयोग एजेंसी’ की स्थापना की भी घोषणा की, जो सौर ऊर्जा एवं सौर तकनीक अनुप्रयोगों (एप्लीकेशन) के विकास के लिए सौर ऊर्जा के मामले में समृद्ध माने जाने वाले देशों का एक गठबंधन होगा। इससे इन देशों की विशेष ऊर्जा संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी।

यही नहीं, इससे आगे चलकर जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि कुल ऊर्जा मिश्रण में सौर ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी। मंत्री ने एनआईएसई परिसर में ‘विश्व नवीकरणीय संग्रहालय’ की स्थापना की तैयारियां करने की भी घोषणा की।

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