भारत कर रहा है ‘पड़ोसी पहले’ नीति पर अमल : जयशंकर

पोखरा (नेपाल), 16 मार्च (आईएएनएस)। भारत ‘पड़ोसी पहले’ नीति पर अमल में नए जोश के साथ लगा है। यह बात यहां भारत के विदेश सचिव एस. जयशंकर ने बुधवार को कही।

विदेश सचिव दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) की स्थाई समिति की 42वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा, “जहां तक भारत का सवाल है, हम नये जोश के साथ ‘पड़ोसी पहले’ नीति पर चल रहे हैं। यह दक्षेस की प्राथमिकमताओं के लिए उठाए गए कदमों को भी प्रदर्शित करता है।”

उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के नवंबर में काठमांडू में हुए दक्षेस सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जो महत्वपूर्ण विचार व्यक्त किए थे, भारत उनका अनुसरण कर रहा है। ये महत्वपूर्ण इस वजह से नहीं हैं कि ये विचार भारत के हैं, बल्कि इस वजह से हैं कि उनमें यह क्षमता है कि वे हमारे अधिकाधिक जुड़ाव एवं एकीकरण के लक्ष्य को हासिल करने में मददगार हो सकते हैं ।

स्थाई समिति दक्षेश देशों के विदेश सचिव स्तर का मंच है। बुधवार की स्थाई समिति बैठक गुरुवार हो होने वाले दक्षेश के विदेश मंत्रियों की 37वें सत्र की बैठक का हिस्सा थी। इस बैठक में हिस्सा लेने के लिए क्षेत्र के अन्य देशों के साथ भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी यहां पहुंची हैं।

भारत द्वारा दक्षेस के लिए जो शुरुआत हुई हैं उनमें दक्षेस वार्षिक आपदा प्रबंधन अभ्यास (एसएडीएमईएक्स), टीबी और एचआईवी के लिए दक्षेस सुप्रा-रेफरेंस लैबोरेटरी, दक्षेस उपग्रह और दक्षेत्र ज्ञान नेटवर्क शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि एसएडीएमईएक्स का पहला आयोजन पिछले साल नवंबर में किया गया था। लैबोरेटरी का काम अभी चल रहा है।

उन्होंने कहा कि दक्षेस के लिए उपग्रह के मुद्दे पर भारत को दक्षेस के अन्य देशों से उत्साहजनक समर्थन मिला है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस साल के अंत तक इसका प्रक्षेपण होगा।

उन्होंने कहा कि यह उपग्रह हम सभी लोगों के लिए मायने रखेगा क्योंकि यह स्वास्थ्य, शिक्षा, आपदा प्रतिक्रिया, मौसम की भविष्यवाणी, संचार आदि क्षेत्र के लिए काम करेगा। दक्षेस नॉलेज पार्क इस क्षेत्र के ज्ञान से जुड़े संस्थानों को तेज नेटवर्क मुहैया कराएगा।

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