रेलवे सभी राज्यों के साथ एसपीवी गठित करेगा : प्रभु (लीड-1)

हैदराबाद, 19 जनवरी (आईएएनएस)। रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि रेल विभाग ने सभी राज्यों के साथ स्पेशल पर्पज व्हिकल्स (एसपीवी) के गठन का फैसला किया है, ताकि संबंधित राज्यों में रेलवे की विशिष्ट परियोजनाएं शुरू की जा सकें। साथ ही उन्होंने यह स्पष्ट किया कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा।

प्रभु ने यहां सोमवार को संवाददाताओं से कहा कि एसपीवी का गठन रेलवे तथा संबंधित राज्य सरकारों की समान भागीदारी में होगा।

उन्होंने कहा, “कुछ राज्यों की हमेशा यह शिकायत रहती है कि रेलवे परियोजनाओं की मंजूरी में उनके साथ न्याय नहीं हुआ। विशिष्ट जरूरतों की पूर्ति के लिए हमने हर राज्य के साथ एसपीवी के गठन का फैसला किया है।”

मंत्री ने कहा कि अपनी प्राथमिकता तय कर हर राज्य उसे रेल मंत्रालय को भेजेगा, जिसे एसपीवी के तहत क्रियान्वित किया जाएगा।

उन्होंने कहा, “जो भी अतिरिक्त राशि बचेगी, उससे राज्य के रेल नेटवर्क के विस्तार तथा अन्य कार्यो पर खर्च किया जाएगा।”

सिकंदराबाद रेलवे स्टेशन पर दो नई रेलगाड़ियों को हरी झंडी दिखाते हुए प्रभु ने कहा कि तीन दिन पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन.चंद्रबाबू नायडू के साथ एक बैठक के दौरान उन्होंने एसपीवी के गठन का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव के साथ आज ही उनकी एक बैठक होगी, जिस दौरान वे उन्हें भी एसपीवी का प्रस्ताव देंगे।

इस राज्य द्वारा नई रेलगाड़ियां, नई रेल लाइनों तथा अन्य परियोजनाओं की मांग पर मंत्री ने कहा कि जरूरतों की पूर्ति के लिए निवेश लाना रेलवे के लिए चुनौतीपूर्ण है।

यह पूछे जाने पर कि क्या रेलवे की खराब माली हालत के मद्देनजर ही निकट भविष्य में रेल भाड़े में वृद्धि होने वाली है, प्रभु ने कहा, “रेलवे पर बोझ पड़ने का मतलब है, आम आदमी पर बोझ पड़ना, क्योंकि रेलवे आम आदमी से ही जुड़ा है।”

उन्होंने कहा, “हमें यह सुनिश्चित करना है कि रेल का संचालन सही तरीके से हो, ज्यादा मुनाफा हो और आम आदमी को ज्यादा सुविधाएं मिले।”

इससे पहले, भारतीय रेलवे में पीपीपी (सार्वजनिक निजी भागीदारी) तथा एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि रेलवे को वित्त तथा प्रौद्योगिकी दोनों ही रूपों में निवेश की जरूरत है। इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि निवेश का संभव स्रोत विदेश से है या देश से।

उन्होंने कहा कि सरकार ऋण के रूप में विदेशी पेंशन फंड से निवेश आमंत्रित करेगी। उन्होंने कहा कि हम इस बात से आश्वस्त हैं कि ये ऋण सस्ती दरों पर मिलेंगी।

रेल नेटवर्क का विस्तार तथा बेहतर सुविधाओं की मांग की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा कि रेलवे को पटरी पर बनाए रखने के लिए आंतरिक स्रोतों सहित समस्त संभावित स्रोतों से फंड इकट्ठा करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

मंत्री ने कहा, “हम इसके लिए प्रयास करेंगे कि रेलवे अपने स्रोतों से अपने लिए फंड का इंतजाम करे और इसके लिए विशिष्ट लक्ष्य निर्धारित किए जाएंगे।”

प्रभु ने इस बात को स्पष्ट किया कि रेलवे का निजीकरण नहीं होगा। उन्होंने कहा, “रेलवे का निजीकरण होने नहीं जा रहा। यह भारत सरकार का ही एक हिस्सा बना रहेगा।”

मंत्री ने कहा कि वैसे भी निवेशक रेलवे का मालिकाना हक नहीं, बल्कि अपने निवेश पर बेहतर मुनाफा चाहते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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