मप्र में कृषि बीमा के नाम पर किसान ठगे गए,कांग्रेस ने सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की

शिवराज सरकार ने किसानों के खातों में फसल बीमा की राशि डालने का काम शुरू कर दिया है. पहले दिन जब किसानों के खाते में बीमा की राशि पहुंची तो कई चौंकाने वाली खबरें सामने आई हैं.किसान संगठनों का दावा है कि देवास जिले में तो किसानों के खाते में 6 और 7 रूपये तक की बीमा राशि आई है. इसे लेकर कांग्रेस ने शिवराज सरकार को निशाने पर लिया है.

भोपाल– मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार ने बड़े जोर शोर से किसानों के खाते में बीमा राशि डालने का एलान किया था. उज्जैन में विशेष कार्यक्रम के तहत फसल बीमा की राशि डालने का काम किया गया. जब किसानों के खाते में बीमा की राशि पहुंची है तो कई चौंकाने वाली खबरें अलग-अलग इलाकों से सामने आईं. किसान संगठनों का दावा है कि देवास जिले में तो किसानों के खाते में 6 और 7 रूपये तक की बीमा राशि आई है. एक तरफ किसान संगठन जहां सरकार से किसानों के साथ भद्दा मजाक करने का आरोप लगा रहे हैं, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इस मामले की जांच कर श्वेत पत्र जारी करने की मांग कर रही है.

कई किसानों को 100 रूपये तक बीमा हासिल नहीं हुआ है. खंडवा जिले के कई किसानों के खाते में 100 रूपये से कम राशि आई है. भारतीय किसान यूनियन का दावा है कि देवास जिले में तो कई किसानों के खाते में महज 6 और 7 रूपये तक बीमा की राशि आई है. भारतीय किसान यूनियन की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि किसानों में सुबह से बड़ा उत्साह था कि बीमा राशि किसानों के खाते में आएगी और किसानों को खेती करना बड़ा आसान हो जाएगा. जो फसलों का नुकसान हुआ है. उससे भी थोड़ी राहत मिलेगी, लेकिन जैसे ही किसानों के खाते में बीमा राशि आती है, तो पता चला कि किसी को 50 और किसी को 100 रूपये बीमा हासिल होता है. देवास के किसानों के खाते में 6 और 7 रूपये आ रहे हैं. किस प्रकार का भद्दा मजाक सरकार ने किया, किस प्रकार की राहत राशि बीमा राशि किसानों को दी गई है और किस प्रकार सर्वे किया गया है. यह सब सोचने का विषय है.

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