इजरायल, वियतनाम के साथ डीटीएटी में संशोधन को मंजूरी

नई दिल्ली, 7 अक्टूबर (आईएएनएस)। कालेधन के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को दोहरे कराधान को टालने और आमदनी तथा पूंजी पर कर के मामले में राजकोषीय चोरी रोकने के लिए भारत इजरायल और वियतनाम के साथ दोहरे कराधान को टालने वाले समझौते (डीटीएटी) में संशोधन करने वाले प्रोटोकॉल को अपनी मंजूरी दे दी।

केंद्रीय बिजली मंत्री पीयूष गोयल ने मंत्रिमंडल की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “डीटीएटी में संशोधन के लिए इजरायल और वियतनाम के साथ दो प्रोटोकॉल पर हस्ताक्षर करने का फैसला किया गया है।”

डीटीएटी का उद्देश्य आय पर दोहरे कराधान से बचना है। यह समझौता द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों तरह का हो सकता है।

भारत का 95 देशों के साथ डीटीएटी है और कई अन्य देशों के साथ भी डीटीएटी की कोशिश जारी है। डीटीएटी वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं अमेरिका, ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात, कनाडा, आस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, न्यूजीलैंड तथा मॉरीशस।

इस प्रोटोकॉल में कर संबंधी सूचनाओं के कारगर ढंग से आदान-प्रदान के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों का जिक्र है, जिनमें बैंक सूचनाएं और बगैर घरेलू कर हित वाली सूचनाएं भी शामिल हैं।

इसमें इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि भारत के किसी निवासी के संबंध में इजरायल और वियतनाम से जो सूचनाएं प्राप्त होंगी, उन्हें उन देशों के सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृति मिलने के बाद अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है। इसी तरह इजरायल और वियतनाम के किसी निवासी के संबंध में भारत से जो सूचनाएं प्राप्त होंगी, उन्हें भारत के सक्षम प्राधिकरण से स्वीकृति मिलने के बाद अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ साझा किया जा सकता है।

इस प्रोटोकॉल में समझौते का दुरुपयोग रोकने के लिए दुरुपयोग रोधी प्रावधान के रूप में ‘लाभ की सीमा’ अनुच्छेद का भी उल्लेख किया गया है। समझौते का दुरुपयोग होने की स्थिति में इस अनुच्छेद के प्रावधानों की बदौलत कर की अदायगी टालने अथवा चोरी से जुड़े उपायों और घरेलू कानून के प्रावधानों का उपयोग किया जा सकेगा

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