छग : कृत्रिम वातावरण में उपजेंगी सब्जियां

राष्ट्रीय कृषि विकास कार्यक्रम के अंतर्गत लगभग 14 करोड़ रुपये की लागत से दस एकड़ क्षेत्र में इस केंद्र का निर्माण किया गया है। इसमें चार पॉलीहाउस, आठ वाक इन टनल और तीन एकड़ क्षेत्र में शेड नेट हाउस बनाए गए हैं।

राज्य के किसानों की रुचि दिन प्रतिदिन उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़ती जा रही है। इनसे और अधिक उपज लेने एवं कम क्षेत्र में कम पानी एवं उर्वरकों के उपयोग के लिए उद्यानिकी फसलों का उत्पादन संरक्षित वातावरण में किया जाना अत्यधिक फायदेमंद होता है।

ग्रीन हाउस के अंदर सभी प्रकार की परिस्थितियां- जैसे तापमान, आद्र्रता, प्रकाश, कार्बन डाइ आक्साइड, हवा का आवागमन, मिट्टी या अन्य माध्यम, पानी, खद, कीट-व्याधि का प्रकोप, खरपतवार आदि को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

इस केंद्र में नर्सरी उत्पादन के लिए भी संरक्षित परिस्थिति का निर्माण किया गया है, जिससे इन ग्रीन हाउस एवं कृषकों के लिए उच्च गुणवत्तायुक्त पौधे तैयार हो सकेंगे।

इस केंद्र के माध्यम से आगामी वर्षो में शासन की संरक्षित खेती योजना (एनएचएम) से जुड़े कृषकों के लिए प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण की व्यवस्था की जाएगी तथा उत्पाद विक्रय श्रृंखला निर्मित की जाएगी। इसके लिए स्पेन एवं इजराइल के विषय विशेषज्ञ प्रशिक्षण दे रहे हैं।

राजधानी रायपुर के ग्राम जोरा में चल रहे राष्ट्रीय कृषि मेले में पशुधन विभाग का मंडप पशुपालक किसानों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मंडप में भारतीय नस्ल के पशुओं, मुर्गे-मुर्गियों और बकरा-बकरियों का प्रदर्शन किया गया है। गौवंशीय में गीर, साहिवाल, केडसिंघी, हारपारकर और भैंसवंशीय में मुर्रा प्रजाति के भैंस स्टॉल में रखे गए हैं।

मंडप में एचएफ नस्ल की गाय विशेष तौर पर किसानों को दिखाने रखी गई है। अधिकारियों ने बताया कि इस नस्ल की गाय दिन में 35 लीटर दूध देती है। स्टॉल में बरसीम, अजोला और नेपियर चारा की प्रदर्शनी भी लगाई गई है।

राष्ट्रीय कृषि मेला में उद्यानिकी संचालनालय का स्टॉल रंग-बिरंगे फूलों से लदे पौधे और फलों के पौधे की बागवानी मेले में आए किसानों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। स्टॉल में बड़ी खूबसूरती से विभिन्न फूलों के पौधे लगाए गए हैं। फलों के पौधे भी सुंदर ढंग से कतार में लगे हुए हैं। मेले में आए किसानों को फूलों की खेती और उद्यानिकी के फायदों के बारे में सरल ढंग से बताया जा रहा है।

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