न्यायाधीशों की निजता का सम्मान करें : सर्वोच्च न्यायालय

नई दिल्ली, 2 जुलाई (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को एक आरटीआई याचिकाकर्ता द्वारा पिछले तीन सालों में सर्वोच्च न्यायालय के वर्तमान और सेवानिवृत न्यायाधीशों और उनके परिजनों के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने की याचिका खारिज कर दी।

सूचना का अधिकार कार्यकर्ता सुभाष चंद्र अग्रवाल की याचिका रद्द करते हुए मुख्य न्यायमूर्ति एच.एल.दत्तू, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति अमित्व रॉय सहित सर्वोच्च न्यायालय खंडपीठ ने कहा, “हम चिकित्सीय इलाज के लिए सार्वजनिक धनराशि का इस्तेमाल करते हैं, जिसके हम हकदार हैं।”

मुख्य न्यायधीश दत्तू ने कहा, “यह कहां समाप्त होगा? आपको न्यायाधीशों की निजता का सम्मान करना चाहिए।” गौरतलब है कि याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने अदालत को यह समझाने की कोशिश कि की न्यायधीशों और उनके परिवारों के चिकित्सीय व्यय की प्रतिपूर्ति सराकरी खजाने से की जाती है, इसलिए इस सूचना का खुलासा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आता है।

भूषण ने अदालत को बताया, “न्यायाधीशों के चिकित्सा व्यय की प्रतिपूर्ति सरकारी खजाने से होती है। क्या यह माना जाए कि इसका सार्वजनिक गतिविधियों और सार्वजनिक हित से कोई संबंध नहीं है?”

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