मांझी का भाजपा से सवाल, जाति जनगणना रिपोर्ट गुप्त क्यों?

पटना, 6 जुलाई (आईएएनएस)। कुछ महीने नीतीश कुमार का उत्तराधिकारी बनने के बाद पार्टी से बगावत कर भाजपा के करीब आए राजग के महादलित नेता व पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी को जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट का खुलासा न करने के भाजपा के फैसले पर आपत्ति है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर जाति सर्वेक्षण की रिपोर्ट को गुप्त रखने की क्या जरूरत है?

मांझी ने अपने फेसबुक वाल पर सोमवार को पोस्ट किया, “जब जातिगत जनगणना के लिए आयोग बना, सर्वे हुआ तो इसे गुप्त रखने की क्या जरूरत है? तथ्य सामने लाया जाना चाहिए।”

मांझी ने अपने फेसबुक वाल पर लिखा है कि जाति आधारित जनगणना रिपोर्ट सामने आने से ये बातें भी सामने भी आएंगी कि देश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिलाओं की कितनी आबादी है। रिपोर्ट आने से इन वर्गो के लिए चलाई जा रही योजनाओं का बजट बनाने में भी सहूलियत होगी।

मांझी ने आगे लिखा, “समाज के लोगों की सही आर्थिक स्थिति के आंकड़े सामने आएंगे। चाहे वे किसी भी जाति के गरीब हो, इस रिपोर्ट में ये पता चलेगा कि कितने लोग भूमिहीन और मकानविहीन हैं। तभी तो इनकी स्थिति में सुधार के लिए प्रभावी निर्णय लिया जा सकता है।”

उन्होंने हालांकि इसे व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि इस सर्वे को सिर्फ जाति से जोड़ना उचित नहीं है, बल्कि सर्वे में इन वर्गो के लोगों की वास्तविक स्थिति का भी पता चलेगा।

उल्लेखनीय है कि मांझी भाजपा के साथ मिलकर आगामी बिहार विधानसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं।

गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी इस मामले को लेकर विरोध दर्ज कर चुका है। राजद के अध्यक्ष लालू प्रसाद रविवार को घोषणा कर चुके हैं कि 13 जुलाई को वह राजभवन तक मार्च करेंगे, साथ ही पार्टी पूरे प्रदेश में भाजपा के इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन करेगी।

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