हरियाणा सरकार ने खेमका के खिलाफ आरोप-पत्र वापस लिया

चंडीगढ़, 4 नवंबर (आईएएनएस)। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका को बड़ी राहत देते हुए मनोहर लाल खट्टर की अगुवाई वाली हरियाणा की भाजपा सरकार ने कांग्रेस अध्यक्ष सेनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा से संबंधित विवादास्पद भूमि मामले में उनके खिलाफ दायर आरोप-पत्र वापस ले लिया लिया है।

आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को कहा कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने खेमका के खिलाफ आरोप-पत्र वापस लेने के लिए पिछले सप्ताह फाइल को मंजूरी दे दी थी।

गौरतलब है कि दिसम्बर 2013 में भूपिंदर सिंह हुड्डा के नेतृत्व वाली तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने वाड्रा की कंपनी स्काईलाइट हॉस्पिटलिटी और रियल एस्टेट कंपनी डीएलएफ के बीच अक्टूबर 2012 में 58 करोड़ रुपये के विवादास्पद भूमि करार का दाखिल खारिज रद्द करने के लिए खेमका पर प्रशासनिक कदाचार और अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करने का आरोप तय किया था।

खेमका ने अक्टूबर 2012 में भूमि करार का दाखिल खारिज रद्द कर दिया था।

हरियाणा सरकार के अधिकारी द्वारा दायर जवाब और इस वर्ष छह अक्टूबर को खट्टर के समक्ष खेमका द्वारा अपना पक्ष रखने के आधार पर आरोप-पत्र वापस लिया गया है।

पूर्ववर्ती हुड्डा सरकार ने वाड्रा और हरियाणा में उनकी कंपनियों के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले खेमका का तबादला कर दिया था, क्योंकि वह वाड्रा के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की तैयारी कर रहे थे।

खेमका ने वाड्रा द्वारा हरियाणा के चार जिलों में किए गए भूमि सौदों के न्यून मूल्यांकन की जांच के आदेश भी दिए थे।

खेमका ने दोनों आदेश राज्य सरकार द्वारा उन्हें महानिदेशक-समेकन और महानिरीक्षक-पंजीयन के पद से हटाने के बाद दिए थे।

खेमका का तबादला ग्यारह अक्टूबर को किया गया था, जबकि आदेश बारह और 15 अक्टूबर को जारी किए गए थे। खेमका ने दावा किया था कि उन्होंने ये आदेश इन पदों को छोड़ने से पूर्व दिए थे।

खेमका पर खुलेआम मीडिया से संपर्क करने के लिए सेवा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया गया था।

हुड्डा सरकार ने इस मामले के लिए वरिष्ठ आईएसएस अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति ने अपनी रपट में कहा था कि खेमका की कार्रवाइयां प्रशासनिक कदाचार थीं और उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थीं।

समिति ने खेमका को एक बार भी बुलाए बगैर या उनकी जांच किए बगर ही अपनी रपट पेश कर दी थी।

खेमका के 105 पत्रों के उत्तर को हरियाणा सरकार ने स्वीकार नहीं किया था। इसमें खेमका ने वाड्रा और अन्य प्रभावशाली व्यक्तियों से संबंधित विभिन्न भूमि घोटालों और दिखावटी सौदों और कंपनियों का खुलासा किया था।

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