पद्मभूषण, पद्मश्री से सम्मानित की गईं खेल हस्तियां (लीड-1)

नई दिल्ली, 30 मार्च (आईएएनएस)। ओलम्पिक में दो पदक जीत चुके मौजूदा स्टार पहलवान सुशील कुमार के प्रशिक्षक तथा एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुके पूर्व पहलवान सतपाल को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को प्रतिष्ठित पद्मभूषण पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया।

राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में इसके अलावा राष्ट्रीय पुरुष हॉकी टीम के कप्तान सरदार सिंह, विश्व चैम्पियनशिप में दो बार कांस्य पदक विजेता बैडमिंटन स्टार पी. वी. सिंधू, एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली अपंग महिला अरूणिमा सिन्हा को पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

गणतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्म पुरस्कारों की सूची में पद्मश्री के लिए पांच खिलाड़ियों के नाम की घोषणा की गई थी, लेकिन सोमवार को आयोजित सम्मान समारोह में सरदार, सिंधू और अरूणिमा को ही सम्मानित किया गया।

पद्मश्री के लिए घोषित दो अन्य खेल हस्तियों में राष्ट्रीय महिला हॉकी टीम की पूर्व कप्तान सबा अंजुम और भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान मिताली राज शामिल थीं, लेकिन सोमवार को पत्र सूचना कार्यालय द्वारा जारी सूची में दोनों खिलाड़ियों के नाम शामिल नहीं हैं।

दूसरे सर्वोच्च पद्म पुरस्कार पद्मभूषण से सम्मानित होने वाले सतपाल ने 1974 के एशियाई खेलों में पहले कांस्य पदक हासिल किया और 1982 के एशियाई खेलों में उन्होंने देश को स्वर्ण पदक दिला दिया।

देश के परंपरागत खेल कुश्ती को अपना योगदान जारी रखने के लिए सतपाल ने बाद में छत्रसाल स्टेडियम में एक ‘अखाड़ा’ स्थापित किया, जिससे सुशील कुमार जैसा स्टार पहलवान निकला। सुशील 2010 में विश्व चैम्पियन रह चुके हैं।

16 बार राष्ट्रीय चैम्पियन रह चुके सतपाल को 1974 में अर्जुन अवार्ड, 1983 में पद्मश्री तथा 2009 में प्रशिक्षक को दिए जाने वाले द्रोणाचार्य अवार्ड से सम्मानित किया गया।

पिछले वर्ष एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीम को 16 वर्ष बाद स्वर्ण पदक दिलाने वाले सरदार ने खुशी जताते हुए कहा, “यह मेरे लिए सम्मान की बात है। मैं इसके लिए हॉकी इंडिया (एचआई) को बधाई देता हूं जिसने हमेशा मेरा हौसला बढ़ाया। साथ ही मैं अपने कोच को भी धन्यवाद देता हूं। इस सम्मान को पाने के बाद मेरी कोशिश और अच्छा हॉकी खेलने और भारतीय हॉकी को नई ऊंचाईयों पर पहुंचाने की होगी।”

सरदार सिंह ने 2006 में पाकिस्तान के खिलाफ मैच से अंतर्राष्ट्रीय हॉकी में कदम रखा और अब तक 200 से भी ज्यादा मैच खेल चुके हैं। सरदार के नेतृत्व में भारतीय हॉकी टीम पिछले लगातार दो बार से राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक हासिल करने में सफल रही है।

सायना नेहवाल के बाद सिंधू देश की बैडमिंटन में दूसरी स्टार के रूप में उभरीं। पिछले वर्ष विश्व चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत उन्होंने अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली वह देश की पहली महिला हैं।

सिंधू पूरे एक वर्ष से विश्व वरीयता में शीर्ष-10 में बनी हुई हैं।

सिंधू ने इस अवसर पर कहा, “सम्माननीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के हाथों पद्मश्री पाकर में बेहद खुश हूं। मैं इतनी खुश हूं कि यह मुझे अविश्वसनीय सा लग रहा है।”

वॉलीबॉल खिलाड़ी से पर्वतारोही बनीं अरूणिमा अपने आप में एक जीती-जागती मिसाल हैं और देश के युवाओं के लिए असीम प्रेरणा का स्रोत हैं।

अरूणिमा को कुछ गुंडा तत्वों ने 2011 में रेल यात्रा के दौरान चलती ट्रेन से नीचे फेंक दिया था, जिसके कारण बुरी तरह जख्मी हुईं अरूणिमा का एक पैर घुटने से नीचे तक काटना पड़ा।

अखिला भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में उपचार के दौरान ही अरूणिमा ने एवरेस्ट फतह करने का दृढ़ निश्चय कर लिया। उपचार के बाद वह एवरेस्ट चढ़ाई करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्र पाल से मिलीं और पर्वतारोहण का अभ्यास शुरू कर दिया और अंतत: 2013 में एवरेस्ट फतह करने वाली दुनिया की पहली महिला पर्वतारोही बनीं।

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