उज्जैन: मौनी बाबा को श्रधांजलि

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उज्जैन के तपस्वी व मशहूर संत मौनी बाबा का 108 साल की उम्र में शनिवार सुबह पुणे में इलाज के दौरान निधन हो गया।
 १०८ वर्षीय मौनीबाबा के जन्म स्थान, शिक्षा और नाम को लेकर कई किवदंती है, मगर प्रमाणित रूप से बताया गया है कि वे वर्ष 1962 में उज्जैन आए थे। उन्होंने शुरुवात के पांच साल नरसिंह घाट पर तपस्या की।
– मौनी बाबा ने उज्जैन में सात दशक पहले गंगाघाट के किनारे एक पेड़ के नीचे अपना आश्रम बनाया था।
– बाबा ज्यादातर अकेले रहना ही पसंद करते थे। वे भक्तों को वर्ष में सिर्फ दो बार गुरु पूर्णिमा तथा 14 दिसंबर को उनके जन्म दिन पर ही आश्रम में दर्शन देते थे। बाबा अधिकांश समय एकांत में बिताते थे।पुणे के एक प्राइवेट अस्पताल में मौनीबाबा का एक महीने से इलाज चल रहा था। उन्हें सांस की समस्या थी। बाद में उन्हें निमोनिया हो गया था।
– चार दिन पहले वे ठीक भी हो गए थे। मगर शुक्रवार दोपहर तबियत बिगड़ने पर उन्हें दोबारा वेंटिलेटर पर रखना पड़ा और शनिवार सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।
 जानकारों के अनुसार मौनी बाबा 1962 में उज्जैन आए थे। उज्जैन आने के बाद बाबा ने प्रारंभ के कुछ समय नरसिंह घाट पर तपस्या की थी। लगभग 5 सालों तक नरसिंह घाट पर तपस्या करने के बाद बाबा ने गंगाघाट को अपनी तपस्थली बना लिया था।

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